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यहाँ Home Page में आपको मै अपनी ज्योतिष site “Https://jyotishjaano.xyz से परिचित करवा रहा हूँ , यहाँ site निर्माण के उद्देश्य से परिचित होंगे.

नमस्कार ,

मेरी site “Jyotish jaano.xyz” के Home Page पर आपका हार्दिक स्वागत है. दोस्तों आपने ज्योतिष शब्द को न केवल सुना होगा बल्कि दैनिक जीवन में इसके प्रभावों से निश्चित रूप से प्रभावित भी हुए होंगे. तो ऐसे में क्या आपको नही लगता है कि आपको भी जीवन की इस आश्चर्यमय सुखद विद्या के बारे में जानना चाहिये.

हां तो इसी और हमारा ये सदप्रयास है. इस भारतीय प्राचीन वैदिक विद्या को जिसे वेदों में आँख यानि दृष्टि के रूप में चित्रित किया गया है. एक ऐसी विद्या जिसको जान कर हम जीवन के विभिन्न रहस्यों को जान कर उनका सामना कर सकते है.

ये एक विस्मय कारी विद्या है इसके रहस्यों को जान कर देशी ही नहीं विदेशी भी आश्चर्य चकित रह जाते है.जिसे जानने के लिए अरब देशो से पूर्व में महान गणितग्य अलबेरुनी भी भारत आया था. पूर्व काल में भारत के अनेक देशो से व्यापारिक, सांस्कृतिक और धार्मिक सम्बन्ध थे वहां के लोग यहाँ आये और अपने निरीक्षण तथा अनुभवों को पुस्तक के रूप में लिख कर ले गए.

सबसे पुराने लेखक और यात्री यूनानी थे. ईसा पूर्व सातवी शताब्दी में इस विद्या का बहुत प्रचार हुआ. वहां के यहूदी और मिस्र वासियों ने इसे अपनाया. पीछे ग्रीक वाशियों में ये विद्या बहुत लोक प्रिये हुई. मुस्लिम यात्रियों में अब्न्बतुता और अलबेरुनी का नाम विशेष उल्लेखनीय है जिन्होंने भारत आकर इस विद्या को सीखा.

सन १०३१-३२ ई० में ‘इंडिका’ नाम से ग्रन्थ को लिखने वाला महमूद गज्नवी के साथ भारत आया अलबेरुनी ही था जिसमे इसने यहाँ के ज्योतिष शास्त्र की बहुत प्रशंसा की है.इस ग्रन्थ को विश्व में बहुत ख्यति प्राप्त हुई है.जर्मन विद्वान ‘एडवर्ड सी सत्रों’ इंडिका में वर्णित सूक्षम ज्योतिर्विज्ञान के सूत्रों को जान कर विशेष प्रभावित हुए.

एक पश्चिमी विद्वान द्वारा लिखित “एस्त्रोनामिया”नाम की पुस्तक ज्योतिष के रेहेस्यो का उदघाटन करती है. पुस्तक में वर्णित विवरण के अनुसार सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध,गुरु,शुक्र, शनि,का प्रकृति के स्थूल, सूक्ष्म,जड़,चेतन,आदि घटकों का सम्बन्ध इन सातो ग्रहो से है.

इसके अलावा एक अन्य भारतीय ज्योतिष विद्या के पश्चिमी प्रशंसक ज्योतिर्विद एवं चिकित्सा शास्त्री ‘डेविड कन्वे’ ने अपनी पुस्तक “मैजीकआफ हर्ब्स” में मनुष्य के शारीर और उसके विभिन्न भागो पर ग्रहो राशियों के प्रभाव का अनोखा वर्णन किया है.

अतीतकाल में भारतीय ज्योतिर्विद्या का न केवल भावत में बल्कि विश्व भर में विदेशी विद्वानों द्वारा बहुत प्रचार हुआ.

मिस्र के विश्वप्रसिद्ध पिरामिडो की रचना सूर्य चन्द्र एवं ग्रह नक्षत्रो की वेधशाला के रूप में की गई है.जिनका आधार गणितीय है.भारत में अनेक स्थानों पर ऐसी वेध शालाये स्थापित थी जिनसे अन्तरिक्ष मंडल का अवलोकन किया जा सकता था. परन्तु मुस्लिम बेवकूफ आतंकियों आक्र्मण कारियो के द्वारा वे नष्ट कर दिए गए.

विक्रमादित्य के नवरत्नों में विख्यात ज्योतिर्विद आचार्य वराहमिहिर ने आज के महरोली जिसका नाम पहले मिहिरावाली था में कुतुब मीनार का निरमाण आज से २२०० वर्ष पूर्व विक्र्मादित्य के शासन काल में करवाया था. अनेक विद्वानों ने खोज कर बताया है की क़ुतुब मीनार पहले एक विश्व प्रसिद्द ज्योतिष वैध शाला थी.जिसे एक आक्रमण कारी कुतुबुद्दीन के नाम पर क़ुतुब मीनार नाम दे दिया गया था.

खैर ये सब वर्णन करने का हमारा उद्देश्य आपको ज्योतिष से लघु रूप से परिचित करवाना था. इसके बाद आपको हम आपने वेब site “jyotishjaano.xyz” के द्वारा ज्योतिष से सम्बंधित हर प्रकार के ज्ञात अज्ञात रहस्यों से परिचित करवाना है. जिसमे ग्रहो, नक्षत्रो , राशियों, कुंडली निर्माण, कुंडली विश्लेष्ण , अष्टकवर्ग निर्माण तथा उसके उद्देश्य से परिचित करवाना है.

इसके अलावा हम यहाँ आपको ज्योतिष पर कविताए, मन्त्र, साहित्य ज्योतिष के उद्देश्यों से भी परिचित करवाएँगे.

post introduction -पेज के अंतर्गत आपको आपनी सभी पोस्ट्स की एक सूची उपलबध करवाई जा रही है.

मेरा परिचय में मै आपको अपने बारे में बता रहा हूं, तथा प्राइवेसी पालिसी के अन्तार्गत site के नियमो से भी अवगत करवाया जा रहा है.

आशा करता हूँ ज्योतिष के जिज्ञासुओ को मेरा ये प्रयास पसंद आएगा और प्रसाद रूप में आपसे समर्थित विजीटिंग क्लिक मुझे मिलेंगे.

आभार स्वरुप -Rajender कुमार Dutt