मेष राशि

मेष राशि
मेष राशि
mesh rashi-min

मेष राशि , राशी मंडल की प्रथम राशी है. कल पुरुष के अंग में इस राशी का अधिकार सिर पर होता है. इसकी चाल तेज व् दांत पंक्ति बहार निकली होती है.

360 अंश के चक्र में इसके हिस्से में प्रथम 00 से 30 अंश का अधिकार क्षेत्र आता है. इस राशी का स्वामी मंगल है. मंगल की ये मूल त्रिकोण राशी भी है. सूर्य इस में 10 अंश पर उच्च का होता है. शनि इस राशी में नीच का प्रभाव रखता है. चन्द्र व् गुरु इस राशी में हो तो मित्र क्षेत्री कहलाते है. शुक्र शनि के लिए ये सम स्थान है तो बुध के लिए शत्रु स्थान है. नक्षत्रो में में अश्विनी भरनी चार – चार चरण तथा कृतिका नाक्षत्र के प्रथम चरण का इस पर अधिकार है. यह अग्नि व् पुरुष तत्व प्रधान राशी है. नर भेढ़ इसका राशी चिन्ह है.

शारीरिक चिन्ह-

मजबूत शरीर,माध्यम ऊंचाई,चुस्त गुलाबी गोरापन लिए इस राशी के मुख्य प्रभाव है. गर्दन लम्बी सिर चोडा चेहरा थोड़ी की और कम चोडा होता है. दांत और आँखे चंचल होती है.

मनोवृत्ति

सक्रीय चतुर सदेव महत्वाकंक्षी, निडर व् साहसी होता है. दूसरो के बताए मार्ग व् पदचिन्हो पर चलना पसंद नहीं करता है. मेष राशि का अधिपत्य पूर्व दिशा में होता है. पित्त प्रकृति और भूमि पर निवास करने वाली होती है. क्षत्रिय वर्ण व् कम संतान वाली होती है. रात्रि बलि क्रूर सवभाव की होती है.

सामान्य चरित्र

प्रथम राशी व् मंगल के प्रभाव के कारण मेष राशी का व्यक्ति सदेव हर जगह अग्रणी स्थान पाने को ललायित रहता है. दूसरो के द्वारा शीघ्र प्रभावित नहीं होता है. दूसरो के बताए मार्ग पर चलना पसंद नहीं करता है. वैज्ञानिक विचारधारा और कार्यप्रणाली वाला , उद्यमी और मेहेत्वाकांशी होना इसके विशेष गुण होते है. आत्म विश्वासी होने के कारण सकारात्मक विचार इनके चरित्र में निखर लाते है. चर राशी होने के कारन जिस वास्तु व् परिस्थिति को ये लोग पसंद नहीं करते है उसमे परिवर्तन करना पसंद नहीं करते है. किसी ग्रह का यदि इस राशी पर दुष्प्रभाव हो तो सिर पर चोट मानसिक आघात का डर बना रहता है.

मेष रही यदि लग्न में हो और शनि और चंद्रमा उसमे स्थित हो तो मानसिक परेशानी बनी रहती है शनि चन्द्र के यहाँ स्थित होने के कारन ऐसे लोग किसी समस्या पर गंभीरता पूर्वक विचार किये बिना गंभी परेशानी में आजाते है. अतः मेष राशी के लग्न वालो को शनि चन्द्र के लग्न में स्थित होने पर विशेष सावधानी बरतने की जरुरत होती है.

सामान्यत मेष राशी वालो का स्वस्थ हमेश ठीक रहता है लेकिन दुर्घटना होने पर sir में चोट लगने की संभावना रहती है. अगर छठा भाव कुप्रभावित है तो सिर दर्द व् पाचन तंत्र सम्बन्धी खराबी हुई रहती है.

मेष राशी वालो का दोस्तों के साथ मित्रवत व्यहवार होता है. जिसके कारन इनकी मित्रो की संख्या बड़ी होती है. ये लोग अपने परिवार के साथ सहयोग बनाए रखते है. और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखते है.

राशि परिचय

के  अंतर्गत वस्तुतः जैसे हम किसी 12 मंजिल की इमारत पर सबसे ऊपर वाली मंजिल पर हों तो हम स्वयं को उच्च कहेंगे और नीचे खड़े व्यक्ति को नीचे खड़े होने के कारण नीचे या नीच कहेंगे। ठीक यही स्थिति ग्रहों के संदर्भ में  भी समझ लेनी चाहिए।

लेकिन परम्परा से चले आ रहे शब्द भ्रम के कारण ग्रह का नीच होना या उच्च होना कहा गया है। वो स्पष्टी करण भी मैं साथ ही साथ करता चलूं।

ऐसा इसलिये होता है रहा क्योंकि ज्योतिशियों ने जनमानस ही नहीं बड़े बड़े राजा महाराजाओं को ठगने के लिये इन शब्दो की कुटिलता को बनाए रखा जो कि बाद में रूढ़ परिपाटी बन गए। यदि ग्रह किसी राशि के किसी  अंश पर उच्च होता है तो उसकी स्वाभाविक शक्ति बढ़ जाती है, और यदि किसी राशि के किसी अंश पर नीच या निम्न स्थिति पर होता है तो इससे उसकी फलदायिनीशक्ति घट जाती है।

तो दोस्तों अपने जाना की राशियों की गुण धर्म व्यक्ति को जीवन में किस किस प्रकार के लाभ हानियों से प्रभावित कर सकते है 

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