मिथुन राशि

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मिथुन राशि
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मिथुन राशि

राशि मंडल की राशियों के परिचय के रूप में हम आपके सामने मिथुन राशि का विषद परिचय प्रस्तुत कर रहे है.

व्यक्ति के शरीर में कंधे से लेकर हाथ तक मिथुन राशि प्रभाव होता है. इसकी आकृति पुरुष- संग स्त्री जोड़े की होती है. स्त्री के हाथ में वीणा और पुरुषके हाथ में गदा होती है. इसका रंग हरा है. यह वायु तत्व पुरुष जाति दिवस्वभाव , शुद्र्वर्ण, कम संतान वाली, आलसी शरीर और पश्चिम दिशा की स्वामी होती है. इस राशि वाले विद्या अध्ययन और शिल्प कला में सिद्ध हस्त होते है.

आकाश मंडल में ज्योतिष चक्र की यह 60 से 90 अंश के स्वामिनी होती है.इस राशि का स्वामी बुध ग्रह होता है. मिथुन राशि वालो में वायु तत्व की प्रधानता होती है. यो तो मिथुन राशि द्विस्वभाव की होती है लेकिंग इसमें पुरुष तत्व की प्रधानता होती है.ये एक स्वर की स्वामिनी है इस राशी का स्वामी बुध होता है.

इस राशि में कोई भी ग्रह उच्च या नीच का प्रभाव नहीं रखता है. गुरु ग्रह के लिए ये एक सम स्थान है. शनि और शुक्र के लिए ये एक मित्र स्थान है, सूर्य , चन्द्र, व् मंगल के लिए मिथुन राशि शत्रु स्थान है. हाथ में गदा लिए हुए पुरुष , और वीणा हाथ में लिए हुए स्त्री इसके शोभा से पूर्ण प्रतीक है चिन्ह है.

मृगशिरा नक्षत्र के तीसरे और चोथे चरण आर्द्रा नक्षत्र के चारो चरण और पुनर्वसु नक्षत्र का पहला चरण मिथुन मिथुन राशि को प्रभाव प्रदान करते है.

शारीरिक लक्षण

सीधा ऊँचा लम्बा शरीर के साथ उभरी हुई नसों वाले हाथ पैरो वाला शरीर कम मोटाई लिए हुए होता है. तेज नजर वाला, आँखों का रंग हल्का भूरा होता है. गहुआ रंग का शरीर होता है.

मानसिकता

निष्कपट सरल स्वाभाव व् तुरंत जवाब देने वाला होता है. लेखन कार्य व् पढ़ने में रूचि होती है. कभी – कभी अस्थिर चित्त के कारण मति भरम का शिकार भी हो जाता है. पल पल बदलने वाला स्वाभाव होता है.

सामान्य चरित्र

सदा काम में लगा रहने वाला , गणित , वैज्ञानिक, और यांत्रिक कार्यो में रूचि वाला होता है. किसी भी विषय में अपने तर्क प्रस्तुत करने में प्रवृत रहता है. लेकिन मिथुन राशि का स्वामी बुध होने के कारण वायु तत्व प्रधान होता है जिस कारन स्वाभाव में स्थिरता की कमी होती है. इसलिए प्रबंधन मैनेजमेंट के कार्य में कुशलता से नहीं कर पाता है.

यात्राए करने का इच्छुक होता है. द्विस्वभाव मिथुन राशि होने के कारन ऐसा व्यक्ति एक समय में अनेक कार्यो को करने का होंसला रखता है. नए लोगो नई परिस्थितियों में अपना स्थान जल्दी से बहा लेता है. सामान्यत: अच्छी आवाज होने के कारण गाने में रूचि होती है.

मिथुन राशि का स्वामी बुध होने के कारण बोद्धिक व् साहित्यिक कार्यो में विशेष रूचि रखता है और नए विषयो पर अपने विचार प्रस्तुत करता है. अपनी हाजिर जवाबी के कारण देश समाज में विशेष स्थान बना लेता है. क्योंकि वायु तत्व प्रधान राशि होती है इसलिए किसी काम को करने के बाद तुरंत परिणाम प्राप्त करने का धेर्य नहीं होता है. जिस कारण कार्यो के सही परिणाम प्राप्त नहीं होते है.

छोटे मार्गो से बड़ी मंजिल को पाने की जल्द् बाजी में छोटे मर्गोकी बड़ी बड़ी परेशानियों में फंस जाता है. धेर्य का आभाव मानसिक परेशानियों का करण बनते है. इस कारण मानसिक रोगों के होने का कारण बन जाता है.

अगर मानसिक तनाव पर नियंतरण रखे तो स्वास्थ्य सामान्य रहता है. बीमारी की दशा में मिथुन राशि वालो को सर्दी जुकाम फेफड़े सम्बन्धी रोग होने की सम्भावना रहती है.

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