भाग्य-एक कथात्मक विवेचन

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भाग्य-एक कथात्मक विवेचन
भाग्य-एक कथात्मक विवेचन
 
भाग्य-एक कथात्मक विवेचन में हम बताएँगे भारतीय ज्योतिषीय परम्परा में किस प्रकार से ज्योतिष को जीवन का एक महत्वपूर्ण आधार स्तम्भ माना गया  है

कथा (Story)भाग्य-एक कथात्मक विवेचन

 
यहाँ मैं भाग्य-एक कथात्मक विवेचन महाभारत से एक उद्धरण प्रस्तुत कर रहा हूँ जो बताता है की पूर्व जन्म के कर्मों को व्यक्ति को किस प्रकार से भुक्त करना पड़ता है। यहाँ एक स्त्री है गौतमी और एक सपेरा, मृत्यु के देवता (काल) के बीच हुए कुछ संवादो का तथ्यात्मक व्यौरा है।

एक ब्राह्मण स्त्री गौतमी का एक ही पुत्र था जिसे साँप ने डँस लिया, इस कारण बालक की मृत्यु हो गई। सांप के दुर्भाग्य से एक सपेरा उसे पकड़ कर गौतमी के पास लाया और पूछा कि इसको किस प्रकार मारा जाए। क्या इसे काट दूं या जीवित ही जला दूं। गौतमी का आदेश हुआ कि इसे जीवित ही छोड़ दिया जाए। इसमें सांप का कोई दोष नही है, क्योंकि भाग्य के प्रभाव से ही मेरे पुत्र की मृत्यु हुई है। कोई प्राणी इसमें कुछ नहीं कर सकता। इसलिये साँप को मारने जैसा काम करके हम लोग पाप ही करेंगे।

अंत में उस समझदार औरत ने यही कहा जो होना था सो हुआ, क्योंकि उसके पुत्र के भाग्य में यही सब था।

सपेरे के दबोचने से साँप अभी मरा नहीं था वह कुछ कुछ साँस ले रहा था, उसने सपेरे से कहा कि उसने तो कुछ गलत नहीं किया है उसने तो मृत्यु के देवता के आदेश का पालन किया है।

लेकिन संपेरा उस साँप को निरअपराध मानने को तैयार नहीं था। उसका तर्क था कि साँप को उसके कर्म का फल मिलना ही चाहिए।

इसी दौरान मृत्युके देवता भी वहाँ आ पहुँचे उन्होंने बताया कि साँप को बच्चे को काटने का आदेश उन्होंने ही समय के देवता के कहने पर दिया था।

यहाँ संदर्भ से अलग हट कर बता दें कि यही सब कुंडली के ग्रहों के द्वारा उनके समय आने पर अच्छा बुरा के आधार पर प्राप्त होता है।इसे ही समय या भाग्य कहते है।

इसी विषय को लेकर मृत्यु के देवता और सपेरे के बीच विवाद बढ़ गया। दोनों मे से कोई भी एक दूसरे की बात से इंच भर भी पीछे हटने को तैयार नहीं था।

आखिर में समय के देवता काल को वहाँ आना पड़ा। उन्होंने बताया कि यह सब तो उस बच्चे के कर्मों का फल था, जो एक निश्चित समय के आने पर उसे मिलना ही था।

मृत्यु के स्वामी और साँप तो केवल एक माध्यम थे।

तो इस कथा को संदर्भित करने का उद्देश्य यही था कि हमने पूर्व जैसे कर्म किये हैं इस जन्म में उसके अनुसार सुख या दुख एक निश्चित समयावधि में प्राप्त होंगे ही।

ये ही कर्म फल ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति और दशा चक्र बनकर प्रारब्ध और काल भाग्यचक्र का प्रति निधित्व करते है।

ज्योतिष शास्त्र का यही विषय है।आजकल बीसवीं सदी के तथाकथित आधुनिक महानुभावों को भाग्यचक्र के बारे में बताओ तो वे इसे मजाक में ही उड़ा देते हैें।ये लोग ऐसे हर व्यक्ति को अपमानित करते हैं जो प्रारब्ध और भाग्य के बारे में बात करता है।

इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए हमारे सामने नित नये उदाहरण आते रहते हैं।जैसे- भारत की पूर्व प्रधान मंत्री अपने दूसरे पुत्र संजय गांधी को भारत के अगले पं्रधानमंत्री के रूप तैयार कर रही थी कि अचानक उसकी एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई।

उनके बड़े पुत्र प्रधानमंत्री बने उनकी मृत्यु के बाद लेकिन उनकी भी एक बम हादसे में तब मृत्यु हुई जब वे प्रधान मंत्री नहीं थे।

भाग्य ने इस परिवार को रहस्यात्मक रूप बंधक बना रखा है क्योंकि वर्तमान में राहुल गांधी चाहते तो प्रधानमंत्री बन जाते लेकिन अगर बनते तो ना जाने क्या होता!

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