भविष्य वाणी कला

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भविष्य वाणी कला कोई आसान कला नही है, इसको जीवन भर सीखते रहना पड़ता है, क्योंकि ग्रह राशि भाव नक्षत्रो का तालमेल बैठाना होता है.

यहाँ कुछ ऐसी स्थितियों का सार भाव प्रस्तुत किया जा रहा है जिसे देख सीख कर आप भविष्य वक्ता बन जाएँगे. अपने परिवार रिश्तेदार जान पहचान वालो की कुण्डलिया पर प्रभावों को लागू

ज्योतिष की भविष्य वाणी कला एक ऐसा विज्ञानं है जो की बुरी तरह से उलझा हुआ है इसे सीखना ही नहीं निपुणता प्राप्त करना भी कठिन है.लेकिन फिर भी इसके कुछ सामान्य पक्ष भी है जिन्हें आप पहचान कर ज्योतिष की सत्यता को अंगीकार कर सकते है.

करके देखें.

_यदि किसी कुंडली में किसी भी भाव में चन्द्रमा मकर राशि यानि 10 के अंक के साथ हो तो समझ लीजिये की उस आदमी को जीवन कम से कम एक बार भारी विफलता का सामना करना पड़ेगा. जिसके कारण व्यक्ति कही मुँह दिखने योग्य नहीं रहता है.

भविष्वाणी कला
भविष्वाणी कला

_ जब किसी कुंडली में एक ही घर में चंद्रमा के साथ शनि राहू एवं मंगल जैसे क्रूर ग्रह हो तो वह आदमी मानसिक रूप से परेशान रहता है बल्कि ऐसे योग वाले पूर्ण नहीं तो आधे पागल जैसी मानसिकता वाले होते है. यहाँ मै अपने ही एक सदस्य का उदाहरण दे रहा हूँ.

भविष्य वाणी कला
भविष्य वाणी कला

शनि रहू केतु मंगल में से चंद्रमा किन्ही दो के साथ हो तो समान रूप से मिलता हुआ प्रभाव पड़ता है. चाहे ख़राब ग्रह साथ भी न हो पर ये ग्रह चंद्रमा के ऊपर अन्य भावो से दृष्टिपात कर रहे हो तो भी जातक जीवन भर परेशान रहता है.

भविष्य वाणी कला
भविष्य वाणी कला

चन्द्र स्थित भाव के आगे पीछे भी यदि दुष्ट ग्रह दृष्टि पात कर रहे हों तो भी मानसिक परेशानी की भावना जातक के मन में बनी रहती है. (इसे पाप करतरी योग कहते है.)

यदि किसी की कुंडली में मंगल और शुक्र एक साथ लग्न में हो या अन्य कही हो तो उस व्यक्ति के एक से अधिक विवाहेत्तर सम्बन्ध होते है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की उसकी हैसियत सामाजिक रूप से कैसी है.

भविष्य वाणी कला
भविष्य वाणी कला

दुसरे भाव स्थित मंगल यदि मकर राशि में स्थित हो तो दो तरह के प्रभाव होते है महिला की कुंडली हो तो उसका पिता गली- गलोच वाली भद्दी मजाक करने वाला होता है. पुरुष की कुंडली हो तो उसका चाचा ठीक इसे प्रकार का होगा.लेकिन जातक खुद बहुत बुद्धिमान होता है.

भविष्य वाणी कला
भविष्य वाणी कला

लग्न स्थित शनि व्यक्ती को विद्वान बनता है. वह समझदार और होशियार होता है.

भविष्य वाणी कला
भविष्य वाणी कला

कर्क लग्न में स्थित गुरु जातक को चरित्रवान उदार शुद्ध चरित्रवान सर्वगुण संम्पन्न बनता है.इसी प्रकार के परिणाम गुरु के पंचम एवं नवंम में होने पर भी होते है .

भविष्य वाणी कला
भविष्य वाणी कला

यदि मंगल या सूर्य किसी भी लग्न में हो व्यक्ती क्रोधी और उत्साही होता है.

मेष लग्न वाला व्यक्ती बहुत धेर्य हीन होता होता है.वह परिणामो को सुनने की प्रतीक्षा न करके स्वयं परिणाम अपने हित में मोड़ने को उत्सुक रहता है.  

कर्क लग्न अथवा कर्क नवम भाव स्थित गुरु चन्द्र व्यक्ति को महान नेता और बहुत प्रसिद्द बनाते है.

यदि केतू मकर लग्न में स्थित हो तो व्यक्ति भूखा नंगा कंगला बीमार हर प्रकार की आभाव ग्रस्त स्थिति का होता है.साथ ही यदि केतु मकर का 7वे भाव का हो तो उसके पति या पत्नी को भी रोग और दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति से गुजरना पड़ता है.

भविष्य वाणी कला
भविष्य वाणी कला

मंगल यदि दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति के सम्बन्ध अपने चाचा से बिगड़े रहते है, या अच्छे रहते है. जो इस बात पर निर्भर है की मंगल कुंडली में किस राशि में है.(यानि पंचधा मैत्री चक्र के अनुसार शत्रु राशि में है या मित्र राशि में)  

मंगल किसी भी राशि का यदि तृतीय भाव में है तो व्यक्ति साहसी बहादुर होता है.किसी भी शोर्य पूर्ण काम में वह सदेव आगे रहता है.कभी भी भय भीत नहीं होता है.

भविष्य वाणी कला
भविष्य वाणी कला

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चार या अधिक ग्रह होते है वह लज्जा कलंक या पराजय की भावना से ग्रस्त होता है.तथा समाज के लोग के सामने वह प्रकट होने में असमर्थ होता है. यहाँ उदाहरण स्वरुप महाराणा प्रताप का उल्लेख करना योग्य होगा. वे अत्यंत सहसी पराक्रमी थे इनकी कुंडली में तीसरे भाव में पांच ग्रह मकर राशि के थे लेकिन इतना कुछ होते हुए भी सफलता नहीं मिली जिसके वे अधिकारी थे .

यदि किसी की कुंडली में किसी भी घर में राहू चन्द्र इकट्ठे तो उस व्यक्ति को जेल जाने का भय सताता रहता है. झूठे सच्चे आरोपों के कारण मुकदमे लड़ने पड़ते है.परिवार में सक्षम व्यक्ति की मौत से अनाश्रित होने का भय पैदा हो जाता है.

किसी की कुंडली में गुरु और चन्द्र कर्क राशि में हो तो वह व्यक्ति अत्यंत सुंदर होता है. यदि लग्न में है तो अत्यंत सुंदर होगा. यदि गुरु चन्द्र शुक्र माता के भाव अर्थात चोथे भाव में हो तो माता सुंदर होती है.यदि गुरु चन्द्र सप्तम भाव में हो तो पत्नी या पति सुंदर होता है.यदि ये दोनों दशम भाव में हो तो व्यक्ति का पिता आकर्षक और प्रभावशाली होता है.  

यदि गुरु शुक्र चन्द्र कर्क राशी में हो तो व्यक्ति का सोंदर्य विशिषठतापूर्ण सीमातीत होता है.

शनि चन्द्र का चोथे भाव में होना व्यक्ति के बचपन व् किशोर अवस्था के लिए घोर विपदाओ के करण होते है आगे के जीवन में भी यह स्थिति नोकरी छूटना अचानक हानि अथवा विपत्तियों का कारण होती है. चन्द्र के तीसरे शनि के चोथे होने पर भी परिणाम समान ही होते है.लेकिन व्यक्ति को जीवन में कभी कभी अचानक प्रचुर धन व् सम्मान की प्राप्ति भी हो जाती है.    

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