बुद्धि

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बुद्धि
(intelligence )बुद्धि


बुद्धि (intelligence )मानव शरीर में सबसे ऊपर ही नहीं मानव जीवन में सबसे महत्वपर्ण स्थान भी रखती है

इसीलिए तुलसीदास ने भी हनुमान जी से यही विनती करी बल ‘‘विद्या बुद्धि देहू मोही हरहू क्लेस विकार’’। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने भी बुद्धि (intelligence )विषय पर पोस्ट लिखना उचित समझा

यदि पंचम स्थान का स्वामी बुध हो और वह किसी शुभ ग्रह की दृष्टि में हो या उसके साथ हो या यदि पंचमेश शुभ ग्रहों से घिरा हुआ हो, यदि बुध उच्च हो (कन्या में),यदि बुध पंचमस्थ हो, पंचमेश जिस नवांश में हो उसका स्वामी केंद्र में हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो इन उपर्युक्त योगों में से किसी के रहने से जातक समझदार, होशियार, और बुद्धिमान होता है।

स्वामी विवेकानंद जी की कुंडली में भी पंचमेश शुक्र न केवल केंद्र में है बल्कि मीन में अर्थात उच्च के नवांश में है और मीन का स्वामी गुरू ग्रह केंद्र में है परन्तु किसी शुभ ग्रह से दृष्ट नहीं है वरन चतुर्थेश मंगल से दृष्ट है।

swami viveka nanad ji
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Viveka nand

पंचमेश जिस स्थान में हो, उस स्थान के स्वामी पर यदि शुभ ग्रह की दृष्टि हो अथवा दोनों तरफ शुभ ग्रह बैैठे हेां तो उसकी बुद्धि बड़ी तीव्र और सूक्ष्म होती है। इसके लिए हमें देखना होगा लोक मान्य बालगंगाधर तिलक की कुंडली को। पंचमेश मंगल चतुर्थस्थ है और उसका स्वामी शुक्र लग्नगत है और उस पर ग्रह स्वामी गुरू की पूर्ण दृष्टि है।

b sury naran-min
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देखो कुंडली बी. सूर्यनाराण राव की पंचमेश कुंभ राशि गत है और कुंभ के स्वामी शनि पर शुक्र एवं गुरू की पूर्ण दृष्टि है।

Ashutosh mukharji-min
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देखो कंुडली सर आशुतोष जी की। पंचमेश बुध लग्न में है। लग्नेश शुक्र द्वितीयस्थान में और बृहस्पतिसे दृष्ट है। इसी में देश के देश के एक अपूर्व बुद्धिमान थे।

इस कुंडली में पंचमेश पंचमस्थ है और उस पर बृहस्पति की पूर्णदृष्टि है। ये बहुत ही असाधारण बुद्धि के राजा थे।

यदि पंचमेश दो शुभ ग्रहों के बीच में हो और बृहस्पति पंचमस्थ हो तथा बुध दोषरहित हो तो जातक तीक्ष्णबुद्धि वाला होता है।

यदि लग्नाधिपति नीच हो अथवा पापयुक्त हो तो उसकी बुद्धि अच्छी नहीं होती है।

यदि पंचमेंश बुध, गुरू, या शुक्र दुःख स्थानगत हो वा अस्त हो तो भी जातक की बुद्धि मलिन होती है।

स्मरण शक्ति

यदि पंचम स्थान में शनि और राहू हों और शुभ ग्रह की पंचम स्थान पर दृष्टि न हो तथा पंचमेश पर पापग्रह की दृष्टि हो और बुध द्वादश स्थान में हो तो स्मरण शक्ति खराब होती है।

इसी तरह पंचमेश के शुभ वा युक्त रहने से अथवा पंचम स्थान के शुभ दृष्ट वा युक्त रहने से वा बृहस्पति से पंचमस्थान के स्वामी के कंेद्र वा त्रिकोण में रहने से स्मरण शक्ति अच्छी होती है।

पंचमेश चंद्रमा पर गुरू की पूर्ण दृष्टि है। इसी योग के प्रभाव से इनको शास्त्रार्थ के समय अनेकानेक धर्मशास्त्रों के प्रभाव की कमी न होती थी।

Ashutosh mukharji-min
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पुनः श्री वल्लभाचार्य जी की कुंडली में गुरू उच्च है और पंचमस्थान उच्च गुरू से दृष्ट भी हैं गुुरू मंगल के साथ और शनि से दृष्ट है। गुरू से मंगल त्रिकोण में है।

Ashutosh mukharji-min
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शनि से ज्ञान का विचार भी होता है में पंचम स्थान पर लग्नेश परमोच्च गुरू एवं उच्च चंद्रमा कीपूर्ण दृष्टि है। अतः इनकी बहुत बढ़िया स्मरण शक्ति थी जिसकास उदाहरण मिलना मुश्किल है। शंकराचार्य की कुंडली

तो इस प्रकार से आपने देखा कि जगत के कुछ महानुभावों की कंुडलियाँ सप्रमाण यह बात सिद्ध कर रही है कि बुद्धि का मानव जीवन ही नहीं ज्योतिष भी महत्वपूर्ण मान कर चलती हैं

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