प्रश्न ज्योतिष

प्रश्न ज्योतिष पर विचार करने के लिए तुरंत समयानुसार अनुसार कुंडली का निर्माण करने के बाद प्रश्न पर विचार प्रस्तुत किया जाता है.

प्रश्न ज्योतिष
प्रश्न ज्योतिष


फलित ज्योतिष में ही प्रश्न ज्योतिष का भी अपना एक महत्त्वपूर्ण स्थान है या यूं भी कह सकते है कि बहुत ज्यादा महत्त्व पूर्ण स्थान है। क्योकि यदि एकबारगी आपके पास जन्म कुंडली नहीं भी है तेा भी आपको अपने प्रश्न का उत्तर शतप्रतिशत मिल ही जाएगा।


इसमें दो प्रकार के प्रश्नों से ज्योतिषी का सामना होता हैं एक वे जो जीवन की वास्तविक परेशानियों से या जिज्ञासाओं से संबंधित होतें हैं और दूसरे वे जिनको लोग ज्योतिषी के पास उसकी परीक्षा लेने के लिए टाइम पास करने के लिए पूछनें आ जाते हैं।


पहले प्रकार के प्रश्नों में जैसे मेरे मुकदमे में मेरे साथ क्या होगा? मेरा अमुक बीमार है क्या वह ठीक हो जाएगा? मेरी शादी कब होगी? खोया हुआ लौट आएगा या नहीं? मेरे व्यापार में उन्नति होगी या नहीं आदि। और दूसरे तरह के प्रश्न होते है जैसे बताओ मेरी मुटठी में क्या है? मेरे मन में क्या है? जिनमे बहुत ही विचार कर उत्तर देने की आवश्कता होती है। पर ऐसे प्रश्नो के उत्तर ना ही दे तो भला है।

वैसे तो हम अपनी पिछली पोस्टो में ज्योतिष के ग्रहो के गुण धर्म राशियों के गुण धर्म भावों के गुण धर्म पर लिख आए है उनको यहां दोहराने कोई औचित्य नहीं है। इन चीजों पर विचार कर के ही यहां भी एक ज्योतिष को लग्न की तात्कालिक कुंडली बना कर उस पर से ही तत्संबंधि प्रश्न का निर्णय ठीक उसी प्रकार से करना होता है जैसे एक न्यायालय का जज वादी प्रति वादी एवं गवाहों के बयान साक्षियों के आधार पर अपना फैंसला देता है। हमें भी ठीक इसी प्रकार सब बातों पर विचार कर एवं देश काल पात्र प्रश्नकर्ता की अवस्था वंश परिस्थिति आदि सब बातों का ध्यान रख कर फल निर्णय करना होता हैं।


प्रश्न खण्ड मंे इत्थशाल योग का बहुत अधिक उपयोग हुआ है। यहा भी हम प्रश्न खंड में इत्थशल और इशराफ योग सहित उदाहरण देंगे।


ज्योतिष ही क्या हर विधा में व्यक्ति को अपना अभ्यास बढ़ाना पड़ता है। अतः प्रश्न ज्योतिष को सीखने में भी अपना अभ्यास ंिकंचित कम नहीं करना चाहिए। आगे सफलता प्रभु इच्छा पर निर्भर है।

प्रश्न सिद्धि कैसे हो? यदि


1 लग्नेश लग्न को, कार्येश कार्य भाव को देखे
2 लग्नेश कार्येश को कार्येश लग्नेश को देखे।
3 कार्येश लग्न को लग्न्ेाश कार्य भाव को देख।
4 लग्न्ेाश कार्येश लग्न में अथवा कार्य भाव में साथ हों।
5 लग्नेेश कार्येश को या कार्येश लग्नेश को देखता हो।
6 लग्नेश कार्येश का पूर्ण चंद्र के साथ कबूल योग हो।
7 लग्न या कार्य भाव पर शुभ ग्रहों की पूर्ण दृष्टि हो।
8 उपरोक्त में से यदि किसी योग को भी चंद्र पूर्णचंद्र की दृष्टि हो या युति निष्पाप हो तो प्रश्नकर्ता को प्रश्न कार्य की पूर्णतया सिद्धि प्राप्त होती है।
9 लग्नेश कार्येश दोनों 2-5-9-10-11 भाव में साथ साथ बैठे हों।तो कार्य सिद्धि होती है।
10 कार्येश शुभ दृष्ट उच्च का हो तो वह दीप्त कहलाता है। कार्य सिद्धि करवाता है। यदि कार्येश नीच का हो तो शुभ दृष्टि होने पर भी असफलता दिलवाता हैं।
11 लग्नेश कार्येश में से कोई वक्री हो तो कुछ बाधा के बाद कार्य सिद्ध होता है।

फल प्राप्ति की अवधि


1 चंद्र के नक्षत्र से उदय लग्न के नक्षत्र तक गिनने से जितनी संख्या आवे उतने दिनों में प्रश्न का फल होगा।
2 प्रश्न के समय जो चंद्र हो उस राशि से लग्न तक गिने जितनी संख्या हो उतने दिनों में कार्य होगा।
3 चंद्र नवांश से जितनी दूर लग्न हो उतने दिनों में कार्य होगा।

चोरी संबंधित प्रश्न


सप्तम स्थान से चोर का विचार करें। चतुर्थ से उसकी प्राप्ति। लग्न से द्रव्य। चंद्रमा धन का स्वामी है। और अष्टम स्थान चोर का धन है। जिसकी चोरी हुई हो उसे लग्नेश समझो।


यदि अष्टमेश सप्तम या अष्टम भाव में हो। लग्नेश सप्तम में वक्री हो और सप्तमेश लग्न में हो।लाभेश अष्टमेश युक्त हों तो चोरी गया धन वापस नहीं मिलता है। सप्तम में शुभ ग्रह हो। धनेश सूर्य के साथ अस्त हो तो चोेर मिल जाए लेकिन धन ना मिले। या प्रश्न कुंडली में लग्नेश की स्थिति खराब हो तो भी चोरी का धन नहीं मिलता है।

विवाह संबंधित प्रश्न


जातक का विवाह होता है —यदि 3.5.6.7.11वे भाव में चंद्र हो और और उस पर गुरू सूर्य बुध की दृष्टि हो। विवाह शीध्र होता है यदि कंेद्र या कोण में शुभ ग्रह हों। शनि सम राशि में हो तो विवाह हों। 6.5.10.11 स्थान में चंद्र हो और दशमेंश या सूर्य से दृष्ट हो। वृष कर्क तुला राशियों का प्रश्न लग्न हो और उसमे शुभ ग्रहो से युक्त या दृष्ट ग्रह बैठे हो तो जातक का विवाह शीध्र होता है।लग्न विषम राशि(मेष , मिथुन, सिंह,तुला, धनु, कुम्भ) में नवांश में चंद्र और शुक्र दोनों बली होकर लग्न को देखते हो तो कन्या का विवाह शीध्र होता है। लग्न में सम राशि में या समराशि के नवांश में शुक्र और चंद्र बली होकर लग्न का देखते हों तो वर को वधु शीध्र मिले।


प्रश्न लग्न में विवाह के संबंध मंें विचार करते समय सप्तमेश का लग्नेश अथवा चंद्रमा के साथ इत्थशाल योग(गोचर में यदि सप्तमेश के अंश ज्यादा हो और लग्नेश या चंद्र के अंश कम हो और सप्तमेश और लग्नेश या चंद्र संबंध आपस में दीप्तांश( के भीतर हो और दोनो में केंद्र या त्रिकोण संबंध हो तो इत्थशाल संबंध होता है।)हो तो विवाह शीघ्र होता है।


प्रश्न ज्योतिष का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है इसकंे लिए सैंकड़ो पोस्ट भी कम पड़ जाएंगी। अतः हमने विस्तार न दिखाते हुए विषय को संक्षिप्त रखते हुए प्रश्न ज्योतिष पर कैसे विचार करना चाहिए इसी पर ज्यादा जोर दिया है।


नोट- हम इत्थशाल पर अलग से अगली पोस्ट में विस्तार से लिखेंगे।

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