नक्षत्र परिचय

ग्रहो को लेकर भविष्वाणी करने की आवशयकता होती है तो उसमे नक्षत्र परिचय देना ज्योतिष में आवश्यक हो जाता है. नक्षत्र ही फल का सूक्ष्म वाहक है.

नक्षत्र परिचय
नक्षत्र परिचय

1- अश्विन नक्षत्र परिचय

मेष राशि द्वारा सूचित नक्षत्रों में से पहला नक्षत्र है अश्विनी। 00से 13डि 20 कला तक का अधिकार क्षेत्र रखता है। नक्षत्र स्वामी केतू है।

विषयों से संबंध

– सिर दर्द, सिर में चोट लगना, दिमागी दुर्बलता, मिर्गी, सिर के आधे भाग में दर्द। बेहोशी, अधिक नींद, पक्षाघात, मलेरिया, चेचक, दिमागी सूजन।

विवेक शून्य, लालची, संपत्ति के लिए चिंता,भाइयों से विरोध। काला जादू गणंेश भगवान, नरसिंह या अंजनी भगवान की पूजा। आभूषणों से विशेष रूचि, जनमानस का प्रिय, समझदार व चतुर हेाता है।मैकेनिकल काम, पुलिस सेना अस्पताल शल्य चिकित्सा अदालत जेल रेलवे मशीन से संबंधित काम, लोहा इस्पात तांबा घुड़सवार व घोडों का व्यापारी।यदि केतू जातक के लिए कंुण्डली में सहायक है तो बच्चे के जन्म समय बच्च्ेा के लिए शल्य क्रिया और गर्भ पात में सहायता देता है। शुभ फल दायी ग्रहों की शुभ दृष्टि के कारण केतू सहायक होता हैं।

2- भरणी नक्षत्र-

13डि20 कला से 26डि40 कला तक मेष राशि में इसका क्षेत्र हेाता है। नक्षत्र का स्वामी शुक्र ओर राशि स्वामी मंगल होगा।

, सिर, सिर के अंदरूनी भागों पर अधिपत्य हेाता हैं।सिर में चोट ज्यादातर माथे या आँखों के पास, यौन रोग का संक्रमण के कारण चेहरा और दृष्टि प्रभावित होना, नजला आँख नाक से द्रव बहना, अपनी इच्छा की संतुष्टि और मौज के लिए बुरी आदतें व कमजोरी होना।

हमेशा भोग विलास की चाह, साहसी व महत्वपूर्ण कार्य करने वाला, वासना युक्त लोभी, अपने उद्देश्यो केा पूरा करने वाला। चतुर।

मंगल शुक्र की दशाओं में जब इनमें से कोई ग्रह मृग्शिरा नक्षत्र के प्रथम भाग में या चित्रा नक्षत्र के द्वितीय भाग में से गोचर काल में गुजरता है तो इन दोनो द्वारा सूचित विषय मिलते हैं इसी तरह चंद्र सूर्य भी जब इस नक्षत्र से गोचर में गुजरते हैं तो विषय फलित होते हैं।सूर्य हर साल 27 अप्रेल से 10 मई के बीच इस क्षेत्र से गोचर में होते हुए ओर चंद्र 27दिन में एक बार दो दिनों के लिए इस क्षेत्र से गुजरता है।

3-कृतिका-

(1 चरण) 26डि 40 कला से 30डि तक मेष में इस नक्षत्र का क्षेत्र होता है।स्वामी सूर्य।

ब्ुाखार, चेचक मलेरिया, प्लेग, छोटी चेचक घाव मस्तिष्क ज्वर, चोट, विस्फोट अग्निकांड।

अच्छे स्वास्थ्य वाला, अति उत्साहित, अग्रणी, उग्र स्वभाव, नेतृत्व करने वाला, प्रतियोगी बुद्धि तार्किक क्षमता आदि।

ज्यादा खाने वाला, पत्नियों में रूचि वाला।जोशीला व्यक्तित्व प्रसिद्ध

भूमि, जायदाद की प्राप्ति, निर्भय, सट्टेबाज, सेना पुलिस उद्योग दवा शल्य समुद्री सेना, रक्षा विभाग, यात्रा , त्यागपत्र, सेवा निवृत्ति रसायन बम पटाखे निर्माता माचिस निर्माता लोहा और स्टील के बर्तन युद्ध सामग्री।

नक्षत्र में शनि जातक को ध्यान रहित ओर तीव्र बनाता है।जबकि मंगल इस क्षेत्र में बहुत आक्रामक बनाता है। ब्रह्मण और खास कर अग्निहोत्र करते हैं भजन पूजन करते हैं सफेद फूल व्याकरण का पंडित नाई खान मजदूर पुरोहित ज्योतिषी बेकार घूूमने वाला और जो त्याग की भावना जताते है इस नक्षत्र से प्रभावित रहते हेैं। यदि किसी जातक की सूर्य मंगल की दशाएं चल रही हों तो नक्षत्र में गोचर काल में फलित होती हैं। सूर्य हर वर्ष 10 मई से 13 तक यहां होता है। सूर्य मंगल की गोचर कालीन दशा में जातक की पदोन्नति होती है।

3-कृतिका

(2.3.4)चरण 0डि से 10डि तक वृषभ राशि में।राशि स्वामी शुक्र नक्षत्र स्वामी सूर्य
मुख, गर्दन, ध्वनि,निचला जबड़ा, सिर का पिछला भाग।
बीमारिया- लाल आँखे, आँखेां का दर्द, गले में दर्द, घुटने में सूजन, गले की ग्रंथी।
हमेशा किसी की चाहत में रहने वाला। सामाजिक अतिथि सत्कार, वैभव, मनोरंजन, उदार, नम्र स्वभाव, उत्साही और आकर्षक, उत्पादक बुद्धि वाला। फलदाई कर्म, व्यापार के लिए उचित, स्ट्टेबाजी, लोक प्रिय और संपन्न।

काम धंधा-

सरकार से लाभ, शत्रुओं पर विजय, मंहंगे रत्न और वस्त्रांें की प्राप्ति, विदेशियों से संबंध, आनंद दायक समारोह, नक्शे बनानेवाला, कलाकार, नाटककार, कवि, डांस, छायांकन अंतराष्ट्रीय व्यापारी।

यदि कोई सूर्य शुक्र आपसी दशा भुक्ति में के दौरान फल निकालना चाहता है तो उसे वह निश्चित करना चाहिए जब ये आपस में अपने अपने भावों पर से गुजरते हैं।

1 राशि स्वामी शुक्र और नक्षत्र स्वामी सूर्य द्वारा शासित यानि कृतिका नक्षत्र के द्वितीय तृतीय और चतुर्थ चरण।
2 राशि स्वामी सूर्य ओर नक्षत्र पूफा यानि कि सिंह राशि के 13अंश 20 कला से लेकर 26अंश 40 कला तक या
3 सूर्य नक्षत्र शुक्र भुक्ति
4 शुक्र नक्षत्र सूर्य भुक्ति

इन दोनों ग्रहों द्वारा सूचित घटनाएं किसी और समय में नहीं हो सकती इसका वर्णन ‘ऊदू दशा’ में विस्तार से किया गया है।

4रोहिणी

वृषभ राशि में 10 डिग्री से 23डि 20 कला तक का क्षेत्र। राशि स्वामी शुक्र।
चेहरा, मुख, जीभ, तालु, गला, माथा, गर्दन, संबंधि तंत्रिका, अस्थि, रक्त, नलिकाएं, आदि।

बीमारियाँ – कण्ठ में तकलीफ, सर्दी जुकाम खांसी पैरो में दर्द, छाति में दर्द, अनियमित मासिक धर्म का होना, सूजन।

मानसिक गुण- शिष्टाचार, अच्छा व्यवहार, प्राकृतिक आनंद की अनुभूति, संगीत कला नाटक से लगाव, लोक कार्यक्रम, माँ से लगाव, सहानुभूति पूर्ण विपरीत योनि की संगति में आनंद का अनुभव, सच्चा निष्कपट, संुदर व्यक्तित्व।

व्यवसाय –

होटल -रेस्टोरेंट- विश्राम गृह, बेकरी, मकान, भूमि, फल, आॅटोमाबाइल, पेट्रोल,आॅयल, दूध, डेयरी फार्म, आइसक्रीम, काँच, प्लास्टिक, सुगंध, अगरवत्ती साबुन, पेंटस, जल रेग तरल पेय पदार्थ तेजाब आदि का व्यापारी- नौसेना न्यायाधीश राजनीतिज्ञ शक्कर, गन्ना, राजा धनी व्यक्ति, गाड़ी वान, गाय, बैल, जलीय जानवर, कृषक, पहाड,़ और जिम्मेदार व्यक्ति।

5 मृग्शिरा

(पूर्वाध)- 23डि20 कला से 30डि तक वृषभ राशि में। स्वामी शुक्र और नक्षत्र स्वामी मंगल।

स्वाथ्य-

समय समय पर स्वास्थय समस्याएं उत्पन्न होगी। उसे गलगण्ड फुंसियो,, यौन रोग, मासिक ऋुतु चक्र से होने वाली परेशानियाँ तथा कंधे पर दर्द हो सकता है। यदि इसके (स्त्री) मार्गशीर्ष नक्षत्र के समय प्रथम ऋतुस्राव के लक्षण प्रकट हों तो वह धर्मात्मा, पति भक्ता या पतिव्रता होगी।

व्यवसाय-

इस्टेट, भूमि, मकान का मालिक, वाद्य यंत्र, प्रर्दशनी, दर्जी खाद आॅटोमोबाइल इंजीनियर आयकर एवं बिक्रीकर विभाग- तम्बाकू- मिष्ठान्न, विवाह, पशु चिकित्सक, टेक्सी ड्राइवर, फल विक्रेता व्यापार, टैक्सटाइल फिल्म उद्योग छायांकन हीर माणिक्य मोती आभूषण वेसलीन पाउडर क्रीम दंत मंजन बं्रश आदि से लाभ।

5 मृग्शिरा

(उत्तरार्ध),मिथुन में 00 से 6डी 40 कला तक । राशि स्वामी बुध और नक्षत्र स्वामी मंगल।
शरीर के अंग- गला- स्वर नली- भुजाएं कंधे कान कंठ के निचले भाग में स्थित नली हीन ग्रंथी।

वीमारियाँ –

मानसिक ऊर्जा,, उत्साह विपुणता, सतर्क तीव्र आवेगी जहरीली जुबान उद्यमी, संपत्तिवान काम विषय में रत,
व्यवसाय- मशीनरी औजार विद्युत सामग्री का व्यापारी, टेलिफोन केबल तार यंत्री शल्य चिकित्सक सैनिक गणितज्ञ, राजदूत ठेकेदार प्रकाशक कम्प्यूटर केलकुलेटर सेल्समैन प्रतिनिधि रेडियो का व्यापारी प्रेस (जलीय पदार्थ- सुगंधित वस्तुए,ं फूल, फल, माला, चिड़िया रत्न, प्रेमी, संगीतज्ञ।

6आर्द्रा-

मिथुन राशि के 6ः40 से 20 डि तक। स्वामी बुध और नक्षत्र स्वामी राहू।
शरीर के अंग गला- कंधे- बाजुएं।

स्वास्थ्य-

गले में सेप्टिक दमा सूखी खांसी गल झिल्ली प्रदाह कान में पस और तकलीफ
मानसिक गुण- सक्रिय बुद्धि पूर्वाभास अच्छा व्यावहारिक ज्ञाता।
व्यावसाय- सेल्समेंन पुस्तक विक्रेता डाक तार विभाग संचार परिवहन आणविक ऊर्जा आकाशवाणी विज्ञापन लेखक अनुसंधान विभाग फिर भी 13डिंे 20 कला का यह क्षेत्र निष्फल ही रहता है। ( इस क्षेत्र में बच्चों के जन्म को सूचित करने वाले ग्रह कमजोर और निष्फल होते है) यह क्षेत्र सांख्यिकी, भोतिकी, गति विज्ञान, गुरूत्वाकर्षण के लिए अच्छा है।

7 पुनर्वसु

प्रथम द्वितीय तृतीय चरण- मिथुन राशि स्वामी बुध और नक्षत्र स्वामी गुरू।
शरीर के अंग- कान कंठ।

स्वास्थ्य- सूजन वायु नलिका का सूजना निमोनिया कान में सूजन एवं दर्द आयोडीन की कमी के कारण घोंघा रोग फेफडों में रक्ता घात
मानसिक गुण- विस्तृत दृष्टि कोण, तीक्ष्ण बुद्धि, सांसारिक ज्ञान, सही धनवान संुदर समझदार नौकर शिल्पकार व्यापारी स्व नियंत्रित सुखी मिलनसार बीमारी से ग्रस्त शीघ्र संतुष्ट।

व्यवसाय-

पत्रकारिता संपादन प्रकाशन सुधार निरीक्षण कला लेखन विज्ञापन प्रचार धर्म कानून साहित्य कविता बीमा दलाली में सफलता लेखापाल सिविल जज यंत्री महापौर कुल का अघ्यापक सचिव रजिस्ट्रार संदेशवाहक तमिल पंडित ज्योतिषी गणितज्ञ लिपिक डाकिया किराना व्यापारी जो ग्रह कुण्डली में संतान को दर्शाते हैं वह इस क्षेत्र में स्थित होकर बल प्राप्त करते है।

7 पुनर्वसु चतुर्थ चरण

कर्क राशि में 00डि से 03डि 20 कला तक। राशि स्वामी चंद्र और नक्षत्र स्वामी गुरू।

शरीर के अंग-

फेफड़े श्वसन सीना उदर ग्रास नली मध्यपट अग्नाशय स्तन दुग्ध वाहिनी वक्षीय।
बीमारियाँ- जलोदर बेरी बेरी उदर अनियमित भूख दूषित रक्त टीवी निमोनिया वायु नलिका का सूजना यकृत की शिकायत पीलिया अजीर्ण।

मानसिक गुण-

उर्वरक कल्पना ईमानदार सच्चा धुन का पक्का विश्वस्त माफ करने प्रवृत्ति सुंदरता की सरहना करने वाला उचित निर्णय और असरदार तर्क अच्छी चेतना साधन संपन्नता नयायपूर्ण परोपकारी करूणाशील सहानुभूति पूर्ण जन्म से धनी राजकुमार राजनीतिज्ञ।
व्यवसाय- महाजन चिकित्सक धार्मिक मुखिया मंदिर अर्थशास्त्र सांख्यकी वकील न्यायधीश प्राध्यापक व्यापारी नाविक यात्री सैल्समैन नर्स दाई जल प्रदाय करने वाला महिला अधिकारी।

8पुष्य-

03डि से 3ः20 से 16डि 40 कला तक कर्क राशि में। राशि स्वामी चंद्र और नक्षत्र स्वामी शनि।
शरीर के अंग- फेफड़े उदर ओर पंसलियाँ।

स्वास्थ्यटी बी श्वास नली में छाले, अमाशय में छाले पित्त नली में पथरी मितली रूकावट स्तन में रगड़ या चोट दंत क्षय या अस्थि का ठीक से न बनना कैंसर तपेदिक पीलिया खाँसी हिचकी त्वचा रोग अत्याधिक पीप अजीर्ण।

मानसिक गुण

अल्प व्यवसाई किफायती रूढ़िवादी संयमी सतर्क नम्र मनन शील व्यवस्थित कार्य शैली, विश्वास प्राप्त करता है।शांत चित्त सभी का चहेता। विद्वान संपत्तिवान

व्यवसाय-

मिट्टी का तेल, खदान उत्पादन, पेट्रोल पेट्रोलियम पदार्थ कोयला भूमि कुंआ उत्खनन नहर प्लम्बर जेलर कब्र खोदने वाला टंकी आदि एवं निर्माण बांध सुरंग और वह जो रात्रि में और भूमि के अंदर कार्य करते हैं तेल विक्रेता।

9 अश्लेषा

कर्क राशि में 16डि 40क से 30डि तक। राशि स्वामी चंद्र और नक्षत्र स्वामी बुध।

शरीर कें अंग फंेफड़े, उदर, ग्रास, नली मध्यप्राचीर, क्लेमरस, यकृत
बीमारियाँ विटामिन बी की कमी मलाशय आसवन घुटने और पैरों में दर्द कफ उदर वायु गुर्दे की सूजन रोग भ्रम फिट पड़ना जलोदर पीलिया तांत्रिकीय अपचन।

मानसिक गुण- दक्ष न्यायपूर्ण उचित बहुमुखी प्रतिभा बातचीत में नकल नवीस और प्रवाह युक्त अच्छा लेखक अन्य भाषाओं का ज्ञानी दूसरो का अनुकरण करने वाला स्वांगी यात्रा प्रिय संगीत ओर साहित्य, कला सीखने की लालसा।

व्यवसायविक्रेता, प्रतिनिधि व्यापार वाणिज्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार लेखक स्याही पंेट्स का निर्माता खाते शिक्षक दूत ज्योतिषी गणितज्ञ दाई नर्स। (बल्ब जड़े, फल, छिपकली, जहर, जंतु, नकली वस्तु- लुटेरे- और सभी प्रकार के चिकित्सक।)

मघा

10- 00डि से 13.20 तक सिंह राशि में । राशि स्वामी सूर्य और ऩक्षत्र स्वामी केतु।
शरीर के अंग– हृदय पृष्ठ भाग मेरूदंड प्लीहा महाधमनी।

बीमारियाँ- अचानक आघात या लालच या जहर से हृदय का पीड़ित होना पीठ का दर्द हैजा हृदय का जल्दी जल्दी धड़कना मूच्र्छा प्रत्यावहन।

मानसिक गुण- वाचाल दृढ़ विरोधी प्रतिरक्षा उदण्ड कामुक घमंडी चिड़चिड़ा अच्छा खिलाड़ी लोगों का विश्वास प्राप्त करता है। उच्च पद पर आसीन लोगों से संपर्क (समृद्धिशाली, कई नौकर रखता है। जीवन का आनंद लेता है उद्यमी और ईश्वर पूजा करता है।

व्यवसाय- रसायन दवा निर्माता , वकील, रक्षा विभाग, शल्य चिकित्सा, चिकित्सा विभाग, सरकारी नौकरी नकली जेवर का निर्माता सस्ते आभूषण।

11- पूर्वा फाल्गुनी-

13ः20 से 26.40 तक सिंह राशि में। राशि स्वामी सूर्य और नक्षत्र स्वामी शुक्र।
शरीर के अंग- हृदय और मेरूदण्ड।
बीमारियाँहृदय में पीड़ा- सदमा- संतान की हानि रक्त अल्पता पैरों में दर्द टखने में सूजन रक्त चाप धमनी चाप धमनी का फैलना हृदय में सूजन बाल्वों में गड़बड़ी।
मानसिक गुण- कवि, संगीत, दानी, स्नेही, जोशील,ा आराम और वैभव पसंद करता है। सच्चा ईमानदार, सतर्क, आकांक्षाओं की पूर्ति करने में सक्षम, एकाग,्र नाटक या नृत्य का शौकीन चित्रकारी, मूर्ति एवं पेंटिंग का शौंक, शौकिया छायांकन, कलाकार, संगीतज्ञ, मृदु भाषी।
व्यवसाय- सरकारी नौकरी, परिवहन, आकाशवाणी, संगीत, अजायबघर, खेलकूद, सिनेमाघर छायांकन, कसाई खाना, पशु विकित्सक, चमड़ा, खाल, होटल, कंैटीन, राजस्व विभाग, भवन निर्माण, शिक्षाविद, उपकुलपति, कन्या महाविद्यालय, या जेल में नौकरी, कांच विक्रेता, सिगरेट निर्माता।

12 उत्तरी फाल्गुनी

(प्रथम चरण) 26.40-30ः00डि तक सिंह राशि में राशि स्वामी सूर्य और नक्षत्र स्वामी।
शरीर के अंग- रीढ़ की हडडी।

बीमरियाँ- पीठ और सिर में दर्द, प्लेग, मस्तिष्क की कोशिकाओं में रक्त के थक्के जमना, रक्त चाप, हृदय का जल्दी धड़कना।

मानसिक गुण हिंसक या अहिंसक, यह इस क्षेत्र में स्थित ग्रहों पर निर्भर करता है। बहुत हिंसक, यदि 28डि 26कला 40 विकला से 29डि13कला20विक सिंह राशि के मध्य में मंगल स्थित हो तो महत्त्वाकांक्षी, अधिकारपपूर्ण, बलशाली, उत्साही, राजस, प्रसिद्ध, आशावादी, अहम ईष्र्यालू, (उदार विद्वान बहुत समृद्ध शाली सभी का चहेता सुखी)

व्यवसाय कोई भी सरकारी नौकरी चिकित्सा रक्षा नौसेना उद्योग वाणिज्य शेयर बाजार हृदय रोग विशेषज्ञ।

12(ब) उत्तरा फाल्गुनी

(द्वितीय,तृतीय,और चतुर्थ चरण00ः10डि तक कन्या राशि में स्वामी बुध और नक्षत्र स्वामी सूर्य।
शरीर के अंग- आंते यकृत।
बीमारियाँ- यकृत में गुल्म, दिक्कतें उदर विकार गले में सूजन व घाव
मानसिक गुण अच्छे विचार, बुद्धिमान, चतुर, व्यवसायिक, बुद्धि, अध्ययन शील, अद्यमी, यांत्रिक व गणित, खगोल, ज्योतिष, शास्त्र में निपुण, चतुर और समालोचक।
व्यवसायकंपनियों का सम्मिश्रण खगोल विद, ज्योतिषी, संचार विभाग, शिक्षा विभाग, हस्त लिपि विशेषज्ञ, राज्यपाल ,पर्यटन विभाग, ठेकेदार, चिकित्सक, लोड स्वास्थ्य विभाग अस्पताल रजिस्ट्रार राजदूत डाक विभाग।

हस्तः-

10डि से 23डि 20 कला तक कन्या राशि में राशि स्वामी बुघ और नक्षत्र स्वामी चंद्र।
शरीर के अंग आंतड़िया, ग्रंथियाँ क्षोभक स्राव।
बीमारियाँ- विटामिन बी की अल्पता, वायु विकार, आंतों में दर्द एवं उनका अव्यवस्थित होना कमजोर कंघे और भुजाएं श्लेष्मा, कृमि, हैजा, पेचिश, आंत्र ज्वर अतिसार फिॅट पड़ना।
मानसिक गुण बेदों का ज्ञाता, पुण्य करने वाला, व्यापारी ,उद्यमी, निर्लज्ज, निर्दयी ,लुटेरा महावत, सारथी, मद्यपान प्रिय, हाथी, शिल्पकार।
व्यवसाय विक्रेता वाणिज्य संचार पुल बांध नहर स्याही निर्माता अधिवक्ता आयात निर्यात कलाकार चित्रकार राजनीतिज्ञ राजदूत संदेशवाहक।
14 चित्रा

(पूर्वार्ध) – अल्सर तीव्र दर्द कृमि चिड़चिड़ापन खुजली पैरों में दर्द जीव जंतुओ द्वारा घाव
मानसिक गुण विनोदी स्वभाव, व्यवहारिक, उत्साही, निडर, साहसी, तार्किक, अधीर, रूष्ट कार्य की अधिकता- (अच्छे वस्त्र पहनने वाला सुंदर आँखें व हाथ पैर)
व्यवसाय– प्रकाशन भवन निर्माता या दलाल अधिवक्ता कर विभाग आयकर बिक्री कर राजस्व वित्त विभाग कारखाना उद्योग विद्युत नहर खदान रक्षा विभाग अंगुली चिंह विशेषज्ञ यातायात एवं कानून व्यवस्था सुनार चित्रकार गायक लेखक गणितज्ञ बुनकर चिकित्सक।
14 ब चित्रा

(उत्तरार्ध)- करूणा शील, ईमानदार, विनीत, बुद्धिमत्ता, तुलनात्मक शक्ति, सहानुभूति पूर्ण, लचीला, संवेदन शील, क्रोध, शीघ्र ,शांत हो जाता है, मीठा व्यवहार ,साझेदारी धीरे धीरे समझता है पर याद रखता है।

व्यवसाय परिवहन, पर्यटन, संगीत नाटक, नाच, कला, सजावट, प्रदर्शनी, पंखा ,एक्स किरण यंत्रों का निर्माता, महिलाओं से शत्रुता, वैज्ञानिक, न्यायाधीश, कृति मिष्ठान्न, बेकरी निर्माता संुगंधित द्रस्य, रेडिमेड वस्त्र, प्लास्टिक, अभ्रक इत्र, पाश्चीकृतदूध, चमड़े से बना समान।

16 अ विशाखा

-1-2-3 चरण– 20डि से30तक राशि स्वामी शुक्र और नक्षत्र स्वामी गुरू।
शरीर के अंग- उदर का निचला भाग- मूत्राशय के आसपास के अंग गुर्दे।
बीमारियाँ- गुर्दे के पास फोड़ा, मधुमेह, मूर्छा चक्कर आना जी मचलाना मस्तिष्क में रक्त संकुलता।

मानसिक गुण अच्छा आचरण, आकर्षक व्यक्तित्व, शांत, ईश्वर पर विश्वास, प्रकृति प्रेमी, भाइचारा, उदार न्यायप्रिय गुणी विस्तृत बुद्धि, सांस्कृतिक (ईष्र्यालू, कांतिमय रूप का लोभी, बातचीत में चतुर और झगड़ालू)

व्यवसाय- व्यापार में साझेदारी, पर्यटन अधिकारी, हवाई यात्रा, विदेशियों से व्यापार फलों के बाग, कर और राजस्व विभाग, विदेशी व्यापार, न्यायधीश, प्रोफेसर, चिकित्सक, निर्माता, रंगीन कागज,सिनेमा का व्यापार, विज्ञापन, कलाकार, मंहगे वस्त्र आभूषण।

16विशाखा

(चतुर्थ चरण) 00डि से3अंश 20कला तक वृश्चिक राशि में राशि स्वामी मंगल और नक्षत्र स्वामी गुरू।
शरीर के अंगमूत्राशय, मूत्र मार्ग नलिका, जननांग, मलाशय, अवरोही कोलोन, पौरूष ग्रंथि।
बीमारियाँ गर्भाशय के रोग, पौरूष ग्रन्थि का बढ़ जाना, मूत्र संबंधी शिकायत, अधिक मूत्र विसर्जन, मासिक धर्म में अधिक रक्त स्राव, फटाव, गुर्दा में पथरी, जलोदर रोग, मूत्र विसर्जन में तकलीफ होना, नक्सीर, रक्तपात,

मानसिक गुणरूढ़ीवादी, प्रतिष्ठित, उत्साही, प्रभावशाली, कुलीन, निष्कपट, ईमानदार, स्पष्ट वक्ता, बन्दरगाह, औद्योगिक ईकाई, रक्षा विभाग, रक्षा मंत्री, आयुर्वेदिक दवाएं।

17 अनुराधा

13डि20कला से 16डि40 कला तक वृश्चिक राशि में। स्वामी मंगल और रक्षत्र स्वामी शनि।
शरीर के अंग- मूत्राशय, जननांग, मलाशय, नासाग्रंथि, जननांगों के आसपास की हड्डीयाँ।
बीमारियाँ- मासिक धर्म में रूकावटें, बांझपन, कब्ज, बवासीर, जुकाम, अस्थि भंग, गले में घाव, फोड़ा आदि।
मानसिक गुण व्यवस्थित, शक्तिशाली, प्रभावी, स्वार्थी, हिंसक, निर्दयी, क्रूर, झूठा, बेईमान, अविवेकी, उत्साही, और व्यावहारिक,(साहसी व्यक्ति, अच्छों के लिए मित्रवत, सभाओं में आनंदित महसूस करने वाला, संघ एवं निगम का अध्यक्ष, यात्री, ईमानदार व्यक्ति, जानवरों की खाल, ऊनी वस्त्र, भूमिगत जल का भविष्य कथन करने वाला, मिट्टी के तेल का व्यापारी, भूख सहन नहीं कर सकता है।
व्यवसाय- खदान यंत्री, वकील दवाएं शल्य चिकित्सक, वाद्यसंगीत, कलाकार होम्योपैथी, वैश्यालय, चमड़े का व्यापार, खालें, ऊनी वस्तुएं। दंत चिकित्सक, जेल विभाग में नौकरी, न्यायधीश प्लंबंर, मेहनत के कार्य, मेहनती व्यक्ति, कोयला मूंगफली, अलसी, सरसों, राई

18 ज्येष्ठा

1816डि40कला से 30 तक वृश्चिक राशि में। राशि स्वामी मंगल और नक्षत्र स्वामी बुध
शरीर के अंग– बड़ी आंत गुदा जननांग, डिम्बग्रंथि, गर्भाशय,
बीमारियाँ– श्वेत प्रदर, खूनी बवासीर, नासूर, गांठ, गुप्तांगों की अस्वस्थता, आंतों का पीड़ित होना, कंधे और भुजाओं में दर्द होना।
मानसिक गुण- अध्ययन शील, फुर्तिला, चतुर अच्छी मनोवृत्ति, निडर, मौखिक लड़ाई से कभी न घबराने वाला। साधन संपन्न, विद्वान, अथक कार्य करने वाला, व्यवसायिक व्यक्ति, तेज स्वभाव, जहरीली जुबान, वाणी, आदर्श परिवार, संपत्ति यश, शाही, विजय का संकल्प, सेना का अधिकारी चोर, अधिक मित्र नहीं हेाते, संतुष्ठ गुणवान और अत्याधिक चिड़चिड़ा।
व्यवसाय- मुद्रण, स्याही, टंकण मशीन, कपड़ा मिल, मशीनरी, उद्योग, बांध, नहर, ताप केंद्र, कृत्रिम जलाशय, वाद्य यंत्र, जल तरंग, बीमा एजेंट, शल्य चिकित्सक, शल्य यंत्र, स्वास्थ्य,वर्धक औषधी, लेस निर्माता, सेना, विज्ञापन, जनप्रचार, पंपसेट, सत्र न्यायधीश, फांसी कारागार, चीरफाड़(पोस्टमार्ट्रम) केल्युलेटर, केबल और तार निर्माता।

19 मूल-

00डि से 13अं 20क तक धनु राशि में। राशि स्वामी गुरू और नक्षत्र स्वामी केतू।
शरीर के अंग- शरीर में किसी भी अंग की खराबी होना, गठिया, कमर मे ंगठिया का दर्द, फेफड़ों से संबंधित तकलीफ।
मानसिक गुण- उदार ईमारदार, सम्मान पूर्ण मैत्री पूर्ण, दयालू, प्रसन्न, नियम का पालन करने वाला क्षमा शील, परोपकारी, सुखी, ईश्वर भीरू, धार्मिक, आशावादी, सदा मनन करने वाला, सामाजिक (घमण्डी, संपत्तिवान, प्रसन्न, दृढ़ बुद्धि पर वैभवशाली जीवन जीने का आदी।)
व्यवसाय- धार्मिक स्थाई निधि, अधिवक्ता, न्यायाधीश, शिक्षक पुरोहित, राजदूत, सभापति, विद्वान, चिकित्सक, आयुर्बेद, सामाजिक कार्यकार्ता, सलाहकार, किराना व्यापारी, घुड़दौड, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, आयात (दवाएं, चिकित्सक, बहुत धनवान व्यक्ति, फल फूल बीज का विक्रेता)

20 पूर्वाषाढ़

13अं 20क से 26अं40क तक धनु राशि में राशि स्वामी गुरू और नक्षत्र स्वामी शुक्र।
बीमारियाँ- साईटिका, मधुमेह, श्वास की बीमारी, बीमारी, गठिया, फेफडो में कैंसर, शीत, नमी, आँखों के कांचीय व जलीय द्रव, घुटने के ऊपर सूजन।
मानसिक गुण- उदार विस्तृत दृष्टिकोण, विद्वान, अच्छा आचरण, शांत सभी से प्रेमवत व्यवहार करने वाला, न्यायी, करूणाशील, संयमित, आशावादी, मंहगी और वैभवशाली वस्तु का शौकीन, नाटक और कला का शौकीन।
(मछुआरा, नाविक, जलीय जानवर सत्य को समर्पित, पुल निर्माता, जल में उत्पन्न होने वाले फल एवं फूल ऐसे जातक की पत्नी मिलनसार होती है।)
व्यवसाय- न्यायधीश, अधिवक्ता, महाजन, खजांची, लेखापाल, निर्देशक वित्त एवं राजस्व विभाग, भोजन, चीनी, रेशम, कपास, स्वर, रेलवे, सड़क, ईमारत, हवाई यात्रा। देवी मंदिर सामाजिक अध्ययन, उद्यान परिवहन संगीत फिल्म विदेश व्यापार, होटल, छात्रावास, साझेदार(व्यापार) आयुर्वेद दवाएं, चिकित्सक, स्त्री एवं बच्चों का अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र।

21(अ) उत्तराषाढ़

(प्रथम चरण)- 26अं40क से30अं तक धनु राशि में। राशि स्वामी गुरू नक्षत्र सवामी सूर्य।
शरीर के अंग- जंघाए कमर धमनियाँ।
स्वास्थ्य- साईटिका, हाथ पांव, का पक्षाघात-फेफड़ों से संबंधित रोग, मानसिक गुण- ऊँचे आदर्श, परोपकारी, कल्याण कारी, धर्म में सफलता प्राप्ति, कानून मानने वाला, विस्तृत बुद्धि, उत्साही, कलंकित धन की चाह नहीं होती आशावादी दृष्टिकोण।
व्यवसाय- पंचायती न्यायाधीश राजनीतिज्ञ, महाजन, वित्त विभाग, जहाजी परिवहन, शिक्षा, धर्म, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, दूतावास, आयुर्वेद दवाएँ, सीमा शुल्क, जेल विभाग, शरणार्थी शिविर, अस्पताल, कल्याणकारी संस्थाएँ।

21उत्तराषाढ़

2,3,4चरण- 00डि से 10डि मकर राशि में राशि स्वामी शनि और नक्षत्र स्वामी सूर्य।
शरीर के अंग- त्वचा, घुटने, घुटने की हड्डी।
बीमारियाँ- त्वचा रोग, कुष्ठ रोग, पाचन संबंधी तकलीफ, पेट में गैंस बनने के कारण बैचैनी, गठिया, तीव्र धड़कन, हृदय घनाग्रता।
मानसिक गुण- व्यवस्थित, कूटनीतिज्ञ, लगन पूर्वक कार्य करने वाला, विश्वस्त, किफायती दूरदर्शी, हठी।
व्यवसाय- कोयला खदान, आयकर अधिकारी, वैज्ञानिक अनुसंधान, वित्त विभाग, खर्च में कमी, नियंत्रण विभाग, वास्तुशाला, स्मारक, पुराने ढंग का, ऊन, हौम्योपैथी, जेल यंत्री, प्राचीन भाषाएं, त्वचा, पशु की खाल,

22श्रवण

10डि से 23अं20क तक मकर राशि में। चंद्र स्वामी।
शरीर के अंग- लिम्फ(लसिका) वाहिनी, घुटने, त्वचा।
बीमारियाँ- गोल परजीवी कृमि, त्वचा रोग, कुष्ठ रोग, फोड़ा, पस बनना, गठिया, क्षयरोग, फुसफुसावरण, कमजोर पाचन शक्ति।
मानसिक गुण-संयमी, रूढ़िवादी, निराशावादी, सचेत, सच्चा, विश्वासी, मरीज, कार्यकर्ता, दूरदर्शी, मनोयोगी (बाजीगर, सदा कर्मठ, काबिल, विष्णुभक्त, शक्तिशाली एवं सच्चे व्यक्ति विद्वान संपत्तिवान और प्रसिद्ध।
व्यवसाय- खदान उत्पाद, तरल द्रव्य, तेल, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, कोयला, गीली मिट्टी, भूमि, कुंए, खाई, सुरंग, मछुआरा, मंत्री, राजा, कृषक, पलम्बर, आइसक्रीम, चालक, मोती, पनडुब्बी।

23(अ) धनिष्ठा

पूर्वार्ध- 23डि20क से 30डि तक मकर राशि में नक्षत्र स्वामी मंगल।
शरीर के अंग- घुटने की कटोरी की हड्डी।
स्वास्थ्य– पैरों में चोट, फोड़ा सूखी खाँसी, ल्ंागड़ापन, अंग विच्छेद।
मानसिक गुण- यंत्री बीमा दार्शनिक होम्यो पैथी, आयुर्वेक जेल, फांसी का तख्त, हत्यारा, कसाई खाना, शल्य चिकित्सा, अंगभंग, श्रमविभाग, कल्याण विभाग, शरणार्थी शिविर व पुनर्वास उद्योग औजार, मद्यशाला, जस्ता, सीमेंट, सीसा, जूट जौं आलू।

23ब धनिष्ठा

(उत्तर्रार्ध)- 00डि से 6अं40 कला तक कुंभ राशि में। राशि स्वामी शनि नक्षत्र स्वामी मंगल।
शरीर के अंग- टखना, हाथ पैर घुटने और टखने के मध्य का भाग।
बीमारियाँ- पैर का अस्थिभंग होना, शिरा का फूलना, रक्त विषाक्तता, हृदयआघात, उच्च रक्त चाप, मूर्छा, तीव्र हृदय धड़कन।
व्यवसाय खेती, चाय, कोयला, राशन और कंट्रोल विभाग, ऊसर भूमि का उद्धार, चमड़ा, त्वचा, पशु की खाल, पोस्टमार्टम, कसाईखाना, पुलिस, सेना, संचाार, मंुद्रण, बाढ़, भूकम्प, युद्ध या दंगा, पीड़ितों का पुनर्वास, स्मारक, वास्तुविज्ञान ठेकेदार। दूरदर्शन। तार विभाग, विद्युत, आणविक ऊर्जा, सभी अनुसंधान कंेद्र।

24शतभिषा

6डि40 कला से 20 तक कुंभ राशि में नक्षत्रस्वामी राहू।
शरीर के अंग- घुटने और टखने के मध्य का भाग पिंडली।
बीमारियाँ– त्वचा रोग, गठिया, कुष्ठ रोग। हृदय का जल्दी धड़कना, उच्च रक्तचाप, अस्थि भंग, लंगड़ा पन।
मानसिक गुण– चेतना, शक्तिशाली स्वतंत्र, मूल, मरीज, आलसी, एकांत, और अलग कार्य करने वाला।
व्यवसाय- वैज्ञानिक, गुप्त विषय, गति विज्ञान, बिजली, हवाइ यात्रा, खागोलशास्त्री, ज्योतिष, प्राचीन विज्ञान का नवीनीकरण, इतिहास, राशन कार्यालय, जनगणना, नियंत्रक सांख्यिकी, तकनीशियन, जेल विभाग, पुरानी हस्तलिपियों का अनुवाद। प्रयोगशालाएं, कारखाने, चर्म शिल्प शालाएं, नकली मुद्राए बनाना।

25 पूर्वाभाद्रपद

1-2-3 चरण- 20डि से 30डि कंुभ राशि में नक्षत्र स्वामी गुरू।
शरीर के अंग- जलोदर, रक्ताघात, टघनों में सूजन रक्तचाप।
मानसिक गुण– मानवीय आशाजनक दार्शनिक, आशावादी, मित्रों से लगाव सच्चा ईमानदार, चेतन, उचित, विज्ञान में रूचि, दर्शनशास्त्र, खगोलशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र साहित्य, आलोचनाएं मददगार, निस्वार्थी, यदि इस क्षेत्र में पापी ग्रह हो लग्न में, तो लुटेरा हत्यारा नास्तिक, लड़ाकू, फांसी की सजा, चतुर।
व्यवसाय- गति विज्ञान, सांख्यिकी, खगोल शास्त्र, ज्योतिष शास्त्र, चिकित्सा का शिक्षक, हवाई यात्रा, नगर निगम, शेयर दलाल, अनुसंधानकर्ता, योजना आयोग, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शिक्षा वित्त राजस्व विभाग, बीमा, मंदिर ट्रस्टी, टकसाल, मुद्रा, भ्रष्टाचार विभाग सी आई डी विभाग।

25ब पूर्वाभाद्रपद

4 चरण- 00डि से 3अं20कला तक मीन राशि में। राशि स्वामी गुरू और नक्षत्र स्वामी गुरू।
शरीर के अंग- पैर व पैर की अंगुली।
बीमारियाँ- सूजन.यकृत बढ़ना आँतों का पीड़ित होना हर्निया। पीलिया।
मानसिक गुण- स्वतंत्र बुद्धि, कल्याण कारी, संगीत कला से लगाव, दर्शन शस्त्र कानून पर चलने वाला सत्यवादी शांत व्यवहार।
राजनीतिज्ञ ,प्राध्यापक, मंत्री सलाहकार अध्यक्ष विधि शिक्षा धार्मिक और वित्त विभाग, न्यायधीश, अधिवक्ता, ट्रस्टी, अस्पताल अकाल और शरणार्थी शिविर योजना आयोग चिकित्सा और शल्य चिकित्सक युद्धबंदी, जोखिम का पंूजी निवेश, समितियाँ।

26 उत्तराभाद्रपद

03डि से 16डि 40 कला तक मीन राशि में नक्षत्र स्वामी शनि।
शरीर के अंग- पैर।
बीमारियाँ- अपच, कब्ज, हर्निया, पैर में अस्थि भंग। क्षय रोग अजीर्ण जलोदर उदर वायु।
मानसिक गुण- सशक्त चरित्र,परोपकारी, दार्शनिक बुद्धि, एकांत प्रिय, गरीबों का मददगार स्वतंत्र (यदि पीड़ित हो तो धोखेबाज)
व्यवसाय- गृह विभाग-कारागार- पागलखाना- यंत्री- आयात- निर्यात- उत्तराधिकारी अस्पताल, धार्मिक और कल्याणकारी संस्था, पनडुब्बी, बीमा, सी.आइ.डी- शिक्षा विभाग, बरसाती, छाता का निर्माण, नाव, तेल, मद्यशाला नदी, नहर, सुरंग, खाई।

27 रेवती

पैर और पैरों की उंगलियाँ।
बीमारियाँ- आंतों में अल्सर, ऐंठन, मरोड़, मांसपेशियों का सिकुड़ना गुर्दे की सूजन, बधिरता दिक्कतें अध्ययनशील मानसिक संतुलन संयुक्तता के लिए चिंतित।
व्यवसाय – प्रकाशक, सम्पादक, धार्मिक, कानूनी, लोक यांत्रिकी विभाग, शेयर दलाल, विज्ञापन, प्रचार, संचार, वकील, न्यायाधीश, प्राध्यापक, राजनीतिज्ञ, राजदूत, प्रतिनिधि दूरभाष, टंकण, आकाशवाणी, मुद्रा। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, संदेश वाहक, दूतावास, लेखपाल, लेखा परीक्षक, ट्रस्टी विश्वविद्यालय रोजगार कार्यालय समाचार पत्र लिपिक आयात निर्यात सीमा शुल्क अधिकारी धार्मिक मुखिया उद्योग अंगुली चिन्ह विशेषज्ञ ज्योतिषी गणितज्ञ दलाल प्रतिनिधि।

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