धनु राशि

Read Time:4 Minute
Page Visited: 120
धनु राशि
धनु राशि
धनु राशि

धनु राशि की आकृति का उपरी भाग धनुष लिए हुए मनुष्य और कमर के नीचे का भाग घोड़े के सामान होता है.ऐसा लगता है की घोडा रूप मानुष तीर चला रहा है.

दोनों जांघो पर इस राशि का अधिकार होता है. धनु राशि, दव्स्वभाव, पित्त प्रकृति क्षत्रिय वर्ण, अग्नि तत्व, कम संतान वाली,और पूर्व दिशा की स्वामिनी होती है. इस राशि के लोग दयालू, परोपकारी,इश्वर भक्त,अधिकार प्रिय और मर्यादा में रहने वाले होते है.

परिचय

ज्योतिष चक्र में नोवी राशी का नाम धनु राशी होती है राशी मंडल में इस राशी का आधिपत्य 240 डिग्री से 270 डिग्री में मध्य होता है. यह दिव्स्वभाव , अग्नि गुणों वाली पुरुष राशी होती है. इस राशी का स्वामी ग्रह गुरु (jupiter) होता है. कोई भी ग्रह इस धनु राशी में उच्चता या नीचता को प्राप्त नहीं होता है. सूर्य , चन्द्रमा मंगल ग्रह धनु राशी में मित्रता का सुख फल व्यक्ति को प्रदान करते है.लेकिन बुध, शुक्र, व् शनि क्योंकि गुरु के शत्रु है, अतः वे शत्रुता जनित फलो को धनु राशी में स्थित होने पर उत्पन्न करते है.

मूल और पूर्वाषाढ़ नक्षत्रो के चारो चरण और पूर्वाषाढ़ नक्षत्र का प्रथम चरण धनु राशी के अंतर्गत आते है. धनु राशी का ऊपर का भाग धड़ पुरुष का व् नीचे का आनक्षत्र परिचयधा भाग घोड़े के सदृश होता है.मनुष्य रुपी उपरी भाग के हाथो में तीर कमान चलते हुए मनुष्य की आकृति होती है.

शारीरिक गुण

इस राशी के व्यक्तियों का औसत से ऊँचा लम्बा कद होता है. गोरा रंग , सुंदर सुगठित शरीर होता है.सुंदर दांत मधुर मुस्कान,भूरा पन लिए हुए बाल, आयु बढ़ने के साथ साथ शारीर में मोटापा आता जाता है.+

मनोवृत्ति

साहसी ,महत्वकांशी,व् उच्चाभिलाषी मनुष्य होते कठिन परिस्थितियों में भी सोच विचार कर निर्णय लेने की क्षमता होती है.दार्शनिक और अन्वियता पूर्ण मनोवृत्ति के मालिक होते है.

चारित्रिक विशेषताए भाग्य-एक कथात्मक विवेचन

संवेदन शीलता के मालिक होते है. पुराणी परम्पराओ की प्रति आदर दिखाते है.अध्ययन शीलता का विशेष गुण लिए हुए होते है. स्पष्ट वक्ता होते है, अपने खुले विचारों को दूसरो के सम्मुख रखने वाले होते है. किसी भी कार्य को करने से पुर्व उसके गुण दोषों का भी विचार कर लेते है.इन गुणों के कारन भले कार्य विलंब से होते है लेकिन सफलता निश्चित होती है.

खेलो सम्बंधित प्रतियोगिताओ में रूचि लेते है, न्याय पूर्ण, प्रतिभा शाली व् आत्मविश्वासी होते है. अपने खान पीन के प्रति सचेत रहते है ,किसी प्रकार के बहरी किखावे में विशवास नहीं रखते है.

श्वास व् कफ सम्बंधित रोगों के होने की आशंका रहती है. बढ़ती उम्र के साथ-साथ गठिया या साइटिका रोग होने की आशंका रहती है.

एक व्यक्ति का प्रशन है की धनु राशि के अंतर्गत किस नाम से मै अपने ज्योतिष केंदर का नाम रखु तो यहाँ सुझाव उपस्थित है.

ज्योतिष केंदर के नाम का सुझाव – यदि ज्योतिष केंदर का नाम का सुझाव चाहिए तो धनु राशि में जब चंद्रमा पूर्वषाड नक्षत्र के दुसरे चरण पर आये तो

वर्ण मिलेगा जिससे “धन्वन्तरी ज्योतिष केंद्र” का नाम मेरी और से आपके लिए सुझाव है की रख लेना

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Leave a Reply

अपनी कुंडली स्वयं बनाओ

बनी हुई कुंडली को देखन या कंप्यूटर से कुंडली बनाना एक ही बात है लेकिन अपनी कुंडली बनाओ इसको यहाँ बताना हमारा उद्देश्य है.

कुम्भ राशि

कुम्भ राशि

कुम्भ राशि की आकृति कंधे पर घड़ा लिए हुए पुरुष की होती है. दोनों पिंडलियों पर इसका अधिकार होता है. भ चक्र की ये ग्यारहवी...