द्रेशकाण

RAshiIdreshan
Ito 10Dig
IIdreshkan
11to 20dig
IIIdreshkan
21to 30dig
1159
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टिपण्णी 1 मेज,2 वृष इत्यादि. *सर्प या पाश, Xनिगड़ ,+पक्षी

[1] भारतीय ज्योतिष में ग्रहो के बालो(strenth) को जानने के लिए दश्वर्ग का सहारा लिया जाता है, जिसमे से एक द्रेशकाण भी है लेकिन यहाँ हमारा द्रेशकाणपर लिखने का एक प्रमुख कारण है, और वो ये की बहुधा आपने एक शब्द देखा सुना पढ़ा होगा २२वांद्रेशकाण,. हंमने इसी पर विचार करने के लिए ये पोस्ट लिखने का फैसला किया.

द्रेशकाण

इसमें प्रत्येक राशि के तीन खंड किये जाते है जो की 10-10 अंश के होते है हर राशि का पहला द्रेशकाण उसका अपना ही होता है, फिर दूसरा द्रेशकाण अपनी राशि से पांचवी राशि का होता है फिर तीसरा द्रेश्कान अपनी राशि से नवी राशि का होता है. इस प्रकार से द्रेश्कान को त्रिकोनेश भी कहते है. ऊपर दी गई table इसको समझने का एक आसान तरीका है.

जन्म पत्री का द्रेशकाण बनाने का तरीका ये है के लग्न जिस द्रेशकाण का होता है. वही राशि द्रेशकाण लग्न कहलाती है.तथा फिर स्पष्ट चक्र में से प्रत्येक अलग – अलग द्रेशकाण होता है उस द्रेशकाण राशि में ही उस ग्रह को स्थापित करना चाहिए .

उदाहरण के रूप में हम यहां एम् कुंडली लेते है.

द्रेशकाण
द्रेशकाण

लग्न स्पष्ट 8-13-21-53 यानि धनु राशि का लग्न पर ये अंश लग्न के स्पष्ट है. अत धनु राशि के 13 अंश पर दूसरा द्रेशकाण है ऊपर द्रेशकाणचक्र में देखने पर धनु का दूसरा द्रेशकाण मेष है. यानि पहली राशि.अत द्रेशकाण लग्न मेष हुआ.

यदि ग्रहो का द्रेशकाण देखना हो तो शनि स्पष्ट 8-20-15-36 अत शनि धनु राशि के तीसरे द्रेशकाण में है जो की सिह 5 राशि है. ठीक इसी प्रकार से सभी ग्रहो और लग्न का हम द्रेशकाण चक्र बना सकते है.

द्रेशकाण के उपयोग

1 द्रेशकाण कुंडली द्वारा जातक के जीवन का सफलता का आकलन किया जाता है. जातक के जीवन के शुरुआत के समय को उदित द्रेशकाण की वजह से उसकी आकृति , कार्य प्रणाली, और प्रकृति के गुण अनुमान किये जाते है. अगर द्रेशकाण सुख करी है तो तो उसे जीवन सभी शुभ फल मिलते है शुभ ग्रहो की दृष्टि द्रेशकाण कुंडली में है तो व्यापार के उद्देश्य से यात्रा पर गया व्यक्ति धन कमा कर लाता है.

जन्म लग्न का दशमेश द्रेशकाण कुंडली में कैसे स्थान में बैठा है ये विचार महत्व पूर्ण है. लग्न के त्रिकोण और पंणफर भावो के ग्रह द्रेशकाणमें शुभ परिणामो को देते है. अपने सहयोगी कैसे होंगे दूसरो का कैसे सहयोग मिलेगा इसका विचार भी द्रेशकाणमें जन्मलग के तृतीयेश की स्थिति से पता चलता है.

युद्ध के उद्देश्य से गया है सशस्त्र जीत उसी की होती है. अगर द्रेशकाण सर्प या बंधक है तो यात्री के लिए अपमान बंधन और मृत्यु होने का भी खतरा रहता है.

एक ऐसा ग्रह जो पाश द्रेशकाण में हो और उस पर case चल रहा हो तो जातक को मृत्यु दंड भी मिल सकता है,

चतुष्पद द्रेशकाण के होने पर अशुभ ग्रहो की दृष्टि हो तो व्यक्ति के घर में किसी पालतू जानवर की मृत्यु हो जाती है. ऐसे द्रेशकाण में पशु नहीं खरीदना चाहिए.

प्रश्न ज्योतिष में चोर के बारे में उसके हाव भाव चेहरे की पहचान का पता लगाया जा सकता है. चोरी के प्रशन में निम्न बाते प्रमुख होती है.

लग्नेश से चोर की आयु और जाती का पता लगाया जाता है. जैसे की शुक्र मंगल बुध यदि सप्तमेश है तो चोर युवा होगा शनि है तो वृद्ध और कला होगा आदि

नवमांश लगने द्वारा खोई हुई चीज के महत्ता (importance) का पता लगता है. द्रेशकाण से चोर की प्रकृति स्वाभाव आदत का पता लगता है.

द्रेशकाण कुंडली के द्वारा किसी व्यक्ति की विशेषताओ का पता लगाने में सहायता मिलती है. इसके लिए द्रेशकाण लग्न को चार वर्गों में बांटते है. क्रूर, जलीय, सोम्य, मिलीजुली. विभिन्न द्रेशकाण लग्नो में जन्मे व्यक्तियों की विशेषताए निम्न होती है.

क्रूर-दुष्ट प्रकृति, आवारा. पाप कर्म में तूची झगडालू.

जलीय -आमोद – प्रमोद में रूचि,दानी, दयालु , खेती किसानी करने वाला , मचली पालन कर आय अर्जित करने वाला ,

सोम्य -दयालु , सुन्दर , प्रसन्न, धनि निरोगी, सदा उन्नति को अग्रसर,

मिश्रित -बुरा व्यवहार, एक से ज्यादा स्त्रियों से सम्बन्ध, बुरी नजर , क्रोधी व्यवहार होता है.

अष्टम भाव के उदित द्रेशकाणके आधार पर भविष्य कथन किया जाता है. अष्टम भाव के द्रेशकाण के आधार पर मृत्यु के कारण को समझा जा सकता है.

22वै द्रेशकाण से क्या देखते है?

द्रेशकाण
द्रेशकाण

मुख्यत इस द्रेशकाण से मृत्युकारी रोगों का अनुमान लगाया जाता है. देखना होगा की २२वे द्रेशकाण कोन सी राशि में पड़ता है और इसका स्वामी और अष्टमेश कौनसे ग्रह है. फिर इन्ही ग्रहो से सम्बंधित रोग विकार जातक की मृतु का कारण बनते है. ऊपर हमने देखा की हमारा लग्न स्पष्ट 8-13-21-53 है. अत धनु दूसरा द्रेश्काण मेष है और मेष से गिनने पर 22 द्रेशकाण मीन होगा इस कारण अश्मस्थ कर्क का स्वामी चन्द्र और कर्क के

तीसरे द्रेशकाण का स्वामी गुरु यानि (२२वा द्रेशकाण) चन्द्र और गुरु में से जो ग्रेह बली होगा उसी ग्रेह के धातु जनित प्रकोप से जातक की मृत्यु होती है. एक ऋषि के कथनानुसार यदि लग्न से २२वा द्रेशकाण मेष राशि का प्रथम द्रेशकाण हो और अष्टम भाव पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो मृत्यु का कारण निम्न लिखित होगा.

22 वा द्रेशकाण यदि पाप ग्रेह से दृष्ट हो तो

मेष – बिच्छु , साप, द्विपद जीव, या पित्त जनित रोग से जाल से , जल जन्तुओ से , नदी तालाब आदि में डूबने से

वृष- चोपाए जानवरों के काटने से -पित्त जनित रोग, अग्नि चोर, बकरी , भेड , आदि पशुओ से – सवारी आदि से गिरने से या लड़ाई से

मिथुन- बुरी बीमारी से, श्वास अथवा खांसी से,-बैल भैसा आधी जानवरों से अथवा गिरने से,- जंगल में चोपाए अथवा गिरने से

कर्क – काष्ठ के रोग से अथवा मन्दाग्नि या अस्त्र शस्त्र से-लाठी की छूट से या मुक्के के वार से-अजीर्ण, अतिसार ,प्लीहा, वात ,गुल्म, प्रमेश, मूर्छा आदि से,

सिंह- विष जल अथवा अनेक रोगों से या ज्यादा खाने वाले पशु से – जल जीव या हृदय रोग से – गुदा रोग, विष अथवा शास्त्र से.

कन्या -चोर ,अग्नि,पक्षी,या सर के रोग से,- प्यास, साप डसने वाले जीव से या घोड़े से – चोपयो से, जल शस्त्र, किसी स्त्री के हाथ का अन्न खाने से

तुला- स्त्री , चोपाया ,अथवा गिरने से – पेट के रोग से- किसी चीज के ऊपर गिरने से

वृश्चिक -शस्त्र, विश, किसी स्त्री के हाथ के भोजन से – कुत्ते के काटने से, हाथी हिरन पशुओ की चोट से

धनु- वात प्रकोप से, विष , मल मूत्र, पेट के रोग अन्य जल जीवो से अग्नि से

मकर- सूअर, अथवा राजा से- जल जीवो या कोड़े की मार से -चोर से , शस्त्र से , या गिरने से

कुम्भ -जल चर जीव , स्त्री , अथवा विष से – गुदा रोग से या कामांध होने से , चोपाए अथवा मुंह की बीमारी से –

मीन -संग्रेहानी रोग से , परमेह अथवा गुल्म रोग से , जल बवासीर रोग, मूत्र कीतर रोग से ,केहुनी घुटना आदि अंगो के रोग से जातक की मृत्यु होती है

इस प्रकार से आपने जाना की 22 वै द्रेश्कान के क्या क्या प्रभाव जातक के जीवन पर मृत्यु तुल तुल्य कष्ट के रूप में मिलते है.

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