ज्योतिष में कितने सब्जेक्ट?

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ज्योतिष शास्त्र भारतीयो की अमूल्य निधि है. ज्योतिष में कितने सब्जेक्ट? है ये उसके व्यावहारिक ज्ञान से ही जाना जा सकता है.

ज्योतिष में कितने सब्जेक्ट?
ज्योतिष में कितने सब्जेक

ज्योतिष शास्त्र व्यापक के साथ व्यवहारिक भी है. प्रयोगात्मक दृष्टि से वैज्ञानिको और विद्वानों के लिए ज्योतिष में कितने सब्जेक्ट है ये इसका कोई अंत ही नहीं है. इसमें अक्षुण भण्डार उपलब्ध है.

ज्योतिष शास्त्र 3 स्कन्धो में 4 लाख शलोको में वर्णित है.गणित, संहिता और जातक(होरा) इसके 3 विभाग है. गणित में जोड़ ,अंतर,गुणन विभाजन, वर्ग, वर्गमूल, घन, घनत्व ये परिकर्म कहे गए है. (mathmatical वर्क) इसमें ग्रहो की चाल और छोटी मोटी क्रियाओ का वर्णन है.

ज्योतिष में अनुयोग (देश, दिशा,और काल ज्ञान) चन्द्र व् सूर्य ग्रहण, इनका उदय अस्त का ज्ञान छाया ज्ञान,चंद्रमा का क्षितिज पर उदय ज्ञान (द्वितीय तिथि को चन्द्र का उदय होने पर दो सींगो के रूप में निकलना “श्रीन्गोनती” कहलाता है का ज्ञान ) साथ ही ग्रह युति (ग्रहो का योग,तथा पात =सूर्य चन्द्र का एक ही साथ होना.) साधन प्रकार कहा गया है.

जातक स्कंध में

राशियों का भेद, ग्रहो की योनी.(ग्रहो के गुण व् जाती आदि) उनके रूप व् गुण , वियोनी ज्ञान,जन्म फल.गर्भ ग्रहन,अर्तिश, आयु, दशा क्रम आजीविका,अष्टक वर्ग, राजयोग, नाभस योग,चन्द्र योग, सन्यास योग, राशि शील, ग्रह की दृष्टि का फल, ग्रहो के भाव फल, आश्रय योग,अनिष्ट योग,स्त्रि जातक के फल, मौत सम्बन्धी विचार, नष्ट जन्म का विधान (द्रेश्कान से जन्म को जानना) द्रेश काणो के रूप.(एक राशी में 3 दृष्कान,1= 10 अंश का )

संहिता में ग्रहो की गति.- पर विचार होता है. साल महीने के लक्षण, तिथि, दिन,नक्षत्र, योग करन मुहूर्त,उपग्रह, सूर्य संक्रांति, ग्रहो का गोचर, चद्रमा और तारा का बल, सारे लग्नो और मौसमो का विचार,गर्भाधान, पुंसवन,जातक कर्म, नाम करन,अन्नप्राशन (फसल बोना)चूड़ा करन-चूड़ी पहरना, कान छिदवाना,मुंडन, वेदारम्भ ,विवाह, प्रतिष्ठा ग्रह्लक्षण यात्रा.ग्रह प्रवेश,आदि का विचार, वर्षा आरम्भ, मुहुर्त् का भी विचार होता है.

गणित , फलित , सिद्धांत,प्रश्न ,और शकुन, के रूप, में विस्तृत हो कर ज्योतिष पाच स्कंध्मय हो गया है.

इन विषयो पर अनेक विद्वानों. की अनेक रचनाए है. अलग अलग कालो में इनमे संशोधन भी हुए है. परिवर्तन भी हुए है. महान ज्योतिष वराहमिहिर ने संशोधन की एक परम्परा को चलाया था.

यद्यपि अनेक बार करण ग्रंथो की सारिनिया तैयार की गई लेकिन बाद में आगे आकाश निरीक्षण क्रियात्मक गणित के आभाव में सारणियो का संशोधन नहीं हुआ.

संहिता शास्त्र की परिभाषा का क्षेत्र बढ़ता गया, कुछ जैन विद्वानों ने जीवनोपयोगी आयुर्वेद के चर्चा भी संहिता के अंतर्गत राखी है. १२वि 13 वि शताब्दी में इस ज्योतिष शास्त्र का बहुत विकास हुआ. उस समय में सभी लोकिक विषयों को इसके अंतर्गत रखा गया.

पांचवी छटी शताब्दी में ज्योतिष का विकास इस प्रकार हुआ की याचक के प्रशन के अक्षरों को आधार बनाकर ही प्रश्न ज्योतिष चल निकली.आगे चल कर इस पर 3 सिद्धांतो का आगमन हुआ.प्रशन अक्षर सिद्धांत, 2 प्रशन लग्न सिद्धांत, 3 स्वरविज्ञान सिधांत

वराह मिहिर के पुत्र पृथु यशा के समय से प्रशन लग्न वाले सिद्धांत का प्रचार पूरे भारत में हुआ.9-10-11वि शताब्दी मे इस सिद्धांत का पूर्ण विकास हुआ. जातक के चेष्टा हाव भाव, का वैज्ञानिक दृष्टि से विश्लेषण करना भी इस सिद्धांत के अंतर्गत आ गया .

शकुन इसे निमित्त शास्त्र भी कहते है. इसका भी प्रचार पुर्व मध्य काल में 9 वि 10 वि शताब्दी मे हुआ था . इस समय में इसने एक अलग शास्त्र का रूप धारण कर लिया था.इसकी सीमा में किसी भी काम को करने से पहले शकुन अपशकुन का विचार करने की परम्परा चली.

भारतीय ज्योतिष एक रहस्य.

प्राचीन काल से प्राय: हर वैज्ञानिक शोध का आधार भारत में अपनी आत्मा का विकास कर उसे परमात्मा में मिलाने का रहा है. दर्शन हो या विज्ञानं सभी का ध्येय विश्व की पहेली को सुलझाने पर रहा है. ज्योतिष भी विज्ञानं होने के कारन इस ब्रह्माण्ड के रहस्य को व्यक्त करने का प्रयत्न करता है.

ज्योतिष शास्त्र में कितने सब्जेक्ट है. ये सब ऊपर वर्णित तथ्यों से पता चल गया होगा. ज्योतिष्का एक नाम ज्योति:शास्त्र भी है. जिसका अर्थ है प्रकाश देने वाला. अर्थात जिस शास्त्र से संसार का मर्म जीवन मरण का रहस्य और जीवन के सुख दुःख पर पूर्ण प्रकाश पड़ता हो.

ज्योतिष शास्त्र के निर्माताओ के दो लक्ष्य रहे ग्रह किरणों का प्रभाव मनुष्य पर ही नहीं वरन जल चर नभ चर, स्थल चर जीवो पर भी पड़ता है. ज्योतिष शास्त्र में मुहूर्त , समय विधान की जो कर्म व्यवस्था है उसका इतना रहस्य है की आकाश में विचरण करते ग्रहो नक्षत्रो की रश्मियों विष व् अन्य गुनवाली रश्मियों का प्रोभाव सदा एक सा नहीं रहता है.

गति की विलक्षणता के कारण किसी विशेष समयावधि में ग्रहो नक्षत्रो का जो वातावरण रहता है. वह अपने कोणात्मक दूरी के कारण किसी कार्य के बिगड़ने और बनने का कारण बन जाता है. इसका प्रभाव शाली गुण मैंने स्वयं अनुभव किया है. प्रश्न ज्योतिष के अंतर्गत बनाइ गई कुंडली के आधार पर यदि फल कथन किये जय तो वे पूर्णत सफल सिद्ध होते है.

विभिन्न कार्यो के लिए मुहूर्त अंध श्रद्धा या विश्वास की चीज नहीं वरन विज्ञानं सम्मत रहस्य पूर्ण है . भारतीय ज्योतिष में एक रहस्य पूर्ण बात ये है कि ग्रह फल के नियामक नहीं अपितु सूचक है.अर्थात ग्रह किसी को सुख दुःख नहीं देते अपितु आने वाले सुख दुःख की सूचना देते है. जबकि पीछे कह आए है की ग्रहो की किरणों का प्रभाव होता है.पर ये याद रखे कि विपरीत वातावरण होने पर प्रभाव अलग से सिद्ध किया जा सकता है. जैसे चन्द्र मणियो या कोई वनस्पति हाथ में ले ली जय तो वह अग्नि जलती नहीं वरन उसकी जलने की शक्ति कम हो जाती है.

अतएव ज्योतिष का फ़ायदा यही है की ग्रहो के स्वभाव और गुणों को जानते हुए आने वाले दुःख के लिए खुद को पहले ही तैयार रखा जाए ताकि दुःख प्रभाव शाली न रहे.

भारतीय ज्योतिष का रहस्य यही है की आने वाले अच्छे बुरे समय का पर्दा फाश करना. ताकि जीवन सुख पूर्वक सुचारू रूप से चल सके. गणित का अभिप्राय भी तभी सफल होगा जबकी वह गुप्त लुप्त ज्योतिष अंश के प्रकाश में जांचा और जाना जाएगा.

ज्योतिष की उपयोगिता क्या है?

लोक में आज भी मनुष्य के समस्त कार्य ज्योतिष अनुसार ही चलते है. व्यवहार में देखे तो दिन, सप्ताह,पक्ष,मॉस,अयन, ऋतू वर्ष,व् त्यौहार तिथि आदि का ज्ञान इसी से होता है. शिक्षित सभ्य समाज तो क्या अनपढ़ किसान भी अपने खेती किसानी के कार्यो को ज्योतिष अनुसार ही करता है. उसे पता है की किस नक्षत्र में वर्षा अच्छी होती है.बीज कब बोना चाहिए.

यदि किसान ज्योतिष के उपयोगी तत्वों को न जानते तो उनका श्रम निष्फल हो जाता . पुरातात्विक कार्य भी ज्योतिष के बिना संभव नहीं.सभी पूरा तत्वविद अपने साथ ज्योतिषी को रखते है.

आयुर्वेद तो वैसे भी ज्योतिष का छोटा भाई है.ज्योतिष के बिना औषधि निर्माण यथा समय गुणयुक्त नहीं किया जा सकता. कारन यह है की ग्रहो के तत्व और प्रभाव को जान कर उन्ही के अनुसार उन्ही के तत्व और प्रभाव वाली औषधि का निर्माण करने से वह गुणकारी हो जाती है. जो इस बात को ध्यान में रखा कर श्रम करते है. सफलता पाते है.

एक अन्य बात ये है की चिकित्सक यदि ज्योतिष ज्ञान रखता है तो वह ग्रहो के अनुसार बीमारी का पता लगा कर और उसे तदनुसार औषधि दे कर बीमार को ठीक कर सकता है. भावार्थ तो ये है की आज यदि सफल होना है तो ज्योतिष अनुसार परामर्श लेकर योजना का कार्यन्वयन करे. क्योकि ज्योतिष में किसी भी सब्जेक्ट को नहीं छोड़ा गया है.

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