क्या मैं गरीब हूँ

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सारी दुनिया में करोड़ों लोग अपनी गरीबी से परेशान है, क्या मैं गरीब हूँ

इसके कुंडली में क्या कारण दीखते है,आइये इस पर विचार करके जाने?

क्या में गरीब हूँ
क्या में गरीब हूँ

गरीबी या निर्धनता जीवन जीने के साधनों या इस हेतु धन के अभाव की स्थिति है।इसलिए क्या मैं गरीब हूँ “गरीबी उन वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति का अभाव है जो व्यक्ति तथा उसके परिवार के स्वास्थ्य और कुशलता को बनाये रखने में आवश्यक है।” इस प्रकार केवल भोजन, वस्त्र और आवास के प्रबन्ध से ही निर्धनता की समस्या समाप्त नहीं हो जाती. बल्कि व्यक्तियों के लिए ऐसी वस्तुएँ भी प्राप्त होना आवश्यक है जिससे स्वास्थ्य और कुशलता का एक सामान्य स्तर बनाये रखा जा सके।(Vikipedia)

वैसे तो कोई भी मनुष्य अपनी दीनता, भाग्यहीनता, गरीबी पर बात करना पसंद नहीं करता है.कोई भी अपनी भाग्यहीनता का योग जानने के लिए उत्सुक नही होता है. लेकिन पूर्व जन्मो के कर्मानुसार ऐसे भी फल लोगो को मिलतेअवश्य है.

भाग्य शाली लोगो के भाग्येश (नवम भाव का स्वामी), द्वितीयेश, लग्नेश आदि का उच्च राशि और शुभ भाव में होना दिखलाता है की व्यक्ति भाग्य शाली होगा।

यदि नवम भाव में शनि हो और चन्द्रमा और लग्नेश नीच हो तो व्यक्ति भिखारी होता है.

सूर्य और चन्द्रमा यदि नीच (तुला, और वृश्चिक) हो तो व्यक्ति अन्य लोगो पर आश्रित होता है.

यदि आठवे भाव में चन्द्रमा नवम भाव में या पंचम भाव में सूर्य, और दशम भाव में चन्द्रमा हो तो व्यक्ति के आर्थिक हालत ख़राब होती है.

चौथे भाव माँ स्वामी यदि अस्त हो,नीच हो,शत्रु ग्रही हो,पाप ग्रहो से घिरा हो, पाप ग्रहो से दृष्ट हो तो ऐसे स्थिति में जातक की अधिकांश सम्पत्ति नष्ट हो जाती है. एक उदाहरण आपको दिखते है नीचे

क्या मैं गरीब हूँ
क्या मैं गरीब हूँ

ये स्वयं में एक विरोधाभासी कुन्डली है. यहाँ षष्ठेश सूर्य ने द्वितीय भाव पर तृतीयेश और अष्टमेश शुक्र ने लग्न पर और एकादशेश, द्वादशेश शनि ने लग्न भाव पर कब्जा कर रखा है इसका असर ये हुआ की समृद्धि तो आई पर समृद्धि को षष्ठेश सूर्य के प्रभाव ने जी भर के कर्जदार बनवा दिया, पंचमेश चन्द्रमा ने बारहवे भाव में बैठ कर संतान को भाग्य हीन बनाया और सबसे ज्यादा ख़राब स्थिति है बुध की है जो अपने चतुर्थ भाव से द्वादश बैठा है (ज्योतिष में नियम है की जिस भाव का स्वामि अपने भाव से पिछले भाव में होता है वह अपने भाव को ख़राब करता है.)बुध के कारण मिली हुई संपत्ति को भी बेच डाला कारण बुध का अस्त होना,अपने भाव से पीछे होना, शनि, मंगल राहु की दृष्टि और केतु का संगी होना, कुल मिला कर इसआदमी ने जहां लम्बी आयु पानी थी वही अपने ग्रहो प्रभाव के कारण मंगल बुध की दशा में 65 वर्ष की उम्र में ह्रदय रोग (ध्यान रहे चौथा भाव ह्रदय को भी दर्शाता है.) और विपन्ना वस्था के कारण दुनिया छोड़ कर जाना पड़ा.

अगर चौथा भाव पाप ग्रहो से घिरा हो,(3 और 5 में अशुभ ग्रहो का होना) चतुर्थ पर पाप ग्रहो की दृष्टि हो या चतुर्थ में पाप ग्रह हो, तो जातक की भू संपत्ति नष्ट होती है. ये सारे नियम उपरोक्त कुन्डलीमे है.

अगर चतुर्थेश नीच हो कर द्वितीयस्थ हो (धनु लग्न) और उसके साथ पाप ग्रह हो तो जातक की भू संपत्ति नष्ट होती है.

उपरोक्त बातो से हामी पता चलता है की यदि भू संतति की रक्षा करनी है तो चतुर्थेश और चतुर्थ का सुरक्षित रहना आवश्यक है. पाप ग्रह कर पाप भाव में सम्बन्ध होने से ही भू संपत्ति में गड़बड़ी होती है..

लोग कहती है की ज्योतिष से हमें क्या फायदा होगा, मेरी सलाह है की जैसे आप बीमार होने पर चिकित्सक की सलाह पर परहेज करते हो, तो उसी प्रकार ज्योतिषी की सलाह पर अपनी संपत्ति की रक्षा करने में सजगता बरते। आशा है क्या मैं गरीब हूँ के कारणो को जान कर अपनी स्थिति का विश्लेषण करने का ज्ञान प्राप्त होगा।

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