कुम्भ राशि

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कुम्भ राशि
कुम्भ राशि

कुम्भ राशि की आकृति कंधे पर घड़ा लिए हुए पुरुष की होती है. दोनों पिंडलियों पर इसका अधिकार होता है. भ चक्र की ये ग्यारहवी राशि है.

कुम्भ राशि एक पुरुष जाती की, स्थिर राशि है. अजीब किस्म का रंग होता है. वायुतत्व वाली दिन में बलवान राशि होती है. और पश्चिम दिशा की स्वामिनी होती है. हस्तकला में कुशल , वैज्ञानिकता का गुण लिए हुए, खोजी प्रकृति का इसका विशेष गुण होता है. आंतो का भी विचार इससे किया जाता है.

ज्योतिष मंडल में इसका स्थान 300 से 330 डिग्री के मध्य होता है. ये एक अचर , वायु गुण, पुरुष मानसिकता वाली राशि होती है. मकर के सामान इस राशि का स्वामी भी शनि होता है. सभी ग्रहो में से कोई भी ग्रह इस राशि में उच्च का या नीच का नहीं होता है.

बुध ग्रह और शुक्र ग्रह के लिए ये एक मित्र राशि है जबकि सूर्य, चंद्रमा, मंगल ब्रहस्पति के लिए कुम्भ राशि एक शत्रु राशि है. धनिष्ठा नक्षत्र का तीसरा व् चोथा चरण,और शतभिषा नक्षत्र के चारो चरण व् पूर्व भद्र पद नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय,तृतीय चरण इस राशि के अंतर्गत आते है. मैत्री चक्रों का परिचय

कुम्भ राशि का चिंह घड़े में से निकलता हुआ पानी है. ध्यान देने की बात है की केवल कुम्भ राशि का ही एक एसा चिंह है जिसमें किसी जानवर को प्रतीक नहीं बनाया गया है.

शारीरिक क्षमता

कुम्भ राशि के लोग मुख्यत मजबूत और आकर्षक देह के लोग होते है. बुद्धिमान दुसरे लोगो के विचारो को समझे की क्षमता वाले होते है.इसलिए कुम्भ राशि वालो को कोई भी अपनी मीठी बातो से मोहित नहीं कर सकता है. दूसरो की सहायता को सदेव तत्पर रहते है. ये दिमागी रूप से इतने सजग होते हैं कि इन्‍हें प्रशंसा अथवा अन्‍य चापलूसी वाले तरीकों से खुश नहीं जा सकता।

सामान्य चरित्र

कुम्भ राशि के लोग दार्शनिक व्यक्तित्व वाले सफल अध्यापक या लेखक होते है. इन्हें दुसरे लोगो में घुलने मिलने में समय लगता है परन्तु जब एक बार सामंजस्य बना लेते है तो सदेव मित्र बने रहते है.

 subhash-chander
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मानवीय संवेदनाओ के प्रति संवेदन शील होने के कारन लोग इनके बारे गलत फहमी पाल लेते है. ये राशि वाले बातचीत में कुशल होते है. वैसे तो शांत स्वाभाव के होते है लेकिंन उकसाने पर अपना आप खो देते है. पारिवारिक जीवन के प्रति समर्पित और जीवन साथी के प्रति प्रेम पूर्ण व्यवहार करते है.  कुंभ राशि अथवा लग्‍न वाली स्त्रियां अपने साथी को संतोषजनक पाने पर उनका पूरा साथ देती हैं.सप्तवर्ग के फल(ग्रह बल)

khushvant-sing
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लोगो में विभिन्न बातो पर अपने विचार खुल कर प्रस्तुत करते है. रहन- सेहन कपडे पहनने , फैशन के प्रति ये लोग उदासीन होते है बस अपनी साधारण वेशभूषा से ही संतुष्ट रहते है.

इन लोगों में प्रत्यक्ष बोध की शक्ति होती है. जिसके कारण ये लोग चिकित्सक,अध्यापक,ज्योतिषी का व्यवसाय अपनाए तो सफल हो जाते है.

इन लोगो को सर्दी व् सर्दी से होने वाले रोगों से बचने के प्रति विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकी इन्हें सर्दी से होने वाले रोग ज्यादा प्रभावित करते है.इन लोगो को थकान जल्दी चढ़ती है अत ज्यादा परिश्रम के काम नहीं कर सकते है. चिंता व् थकान के कारण पाचन तंत्र भी प्रभावित हो सकता है.

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