कुंडली में विद्या योग(Education)

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कुंडली में विद्या योग

दोस्तों मनुष्य हो कर भी जिसने विद्या न पाई वह पशु सामान है, कुंडली में विद्या योग है या नहीं इसे आगे जानेंगे

पूर्व काल में शिक्षा

आपको ये तो पता ही होगा कि भारतीय वैदिक परम्परा में (मनु स्मृति ) में मनुष्य की कुल आयु को 100 वर्षो का मान कर उसे चार आयु खंडो में बाँटा गया था 1 ब्रह्मचर्य आश्रम ,२ ग्रहस्थ आश्रम, 3 वानप्रस्थ आश्रम 4 संन्यास आश्रम। पूर्व काल में प्रथम सन्यास आश्रम के अंतर्गत ही हमें विद्या अध्ययन का अवसर प्राप्त होता था. लेकिन, आज के समय में तो आश्रम व्यवस्थ समाप्त हो गई है, अब हम सीधे ही शिक्षा प्राप्त करने स्कूल चले जाते है. आगे देखेंगे कि कुंडली में विद्या योग है या नहीं।

भावो व ग्रहो के विषय

भावो की जानकारी

हम किसी भी व्यक्ति की कुन्डली मे चतुर्थ स्थान से विद्या का विचार करते है, और पंचम भाव से उसके बुद्धि चातुर्य का. विद्या और बुद्धि का घनिष्ठ सम्बन्ध होने के चलते बात आ जाती है विद्या आधारित सामाजिक प्रतिष्ठा और कौशल्य की तो यहाँ इसका सम्बन्ध कुंडली के दशम भाव से भी जुड़ जाता है. जिसके कारण व्यक्ति को यश और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है.

जीवन में विद्या का सम्बन्ध प्राथमिक विद्यालय से यूनिवर्सिटी तक से होता है. परीक्षा में फ़ैल या पास होने का सम्बन्ध दशम भाव और बुद्धि का पंचम से है. कुंडली में विद्या योग

आज के समय में विद्या प्राप्ति के भी अनेक विभाग हो गए है. जैसे गणित , व्याकरण, साहित्य , क़ानून, ज्योतिष,अध्यात्मविद्या, काव्य, कंप्यूटर, वेब आदि।

गुरु ग्रह से -वेद वेदांत, ज्योतिष आदि विद्याओ का विचार किया जाता है.

बुध से चिकित्सा, और शुक्र से गायकी, कलाकारी, भाषण,साहित्य आदि पर विचार किया जाता है. ऐसे ही सूर्य से वेदांत, चन्द्रमा से चिकित्सा, और राहु व् शनि से दूर देशो के बारे में अध्ययन किया जाता है.

भारत की प्राचीन ज्योतिष की शास्त्रीय पुस्तकों से यहाँ मैं छांट कर निकले गए नियमो को उद्धृत कर रहा हूँ.

चौथे भाव में स्थित शुक्र जातक को संगीत विद्या में निपुण बनाता है. चौथे भाव में ही यदि शुक्र, बुध, रवि स्थित होतो जातक कवि बनता है. चौथे भाव में ही बुध व्यक्ति को ज्योतिष भी बनता है.

यहाँ स्थित रवि बुध जातक को गणित विद्या में अध्ययन शील बनाता है. यदि सूर्य चन्द्रमा साथ साथ होतो व्यक्ति राजनीतिक विज्ञानं, मनोविज्ञान ,का अध्ययन करता है.

सूर्य, बुध,मंगल के साथ यदि यही गुरु भी हो तो व्यक्ति को तर्क शक्ति और वेदांग में महारथी बनता है. भाव का फल देखने के लिए भाव और भव स्वामी ही नहीं वहां स्थित ग्रहो को भी उनके ऊपर उल्लिखित फलो को लागू करना चाहिए। कुंडली में विद्या योग

इसको इस प्रकार से समझे की जैसे चौथे भाव का स्वामी शुक्र है और बुध और मंगल के साथ है व् यहाँ शनि +चन्द्रमा भी साथ है तो वह व्यक्ति अनेक विद्याओ का ज्ञाता होता है.

निष्कर्षतः भाव ये निकला जाएगा की चौथे भाव का स्वामी, साथ में स्थित ग्रह की प्रकृति के आधार पर भाव का फल कैसा होगा।

जैसे सूर्य राजा तो व्यक्ति के बारे में शासक होने के बात कहि जाएगी।मंगल योद्धा है तो तदनुरूप बात कही जाएगी।बुध चिन्तनशील है. गुरु आध्यात्मिक है जैसे पादरी, पंडित, न्यायाधीश। शुक्र दार्शनिक कवि है. शनि नेता लीडर है. राहु राजनीतिज्ञ, व् केतु पैगम्बर है.

उदाहरण

कुंडली के निष्कर्ष निकलने के लिए इन संकेतकों का ध्यान रहना अनिवार्य है. ज्योतिष एक विज्ञानं है इसमें मिले संकेतो को सावधानी पूर्वक कुंडली में लागू करने पर यह वरदान साबित होती है. हमें कुंडली से मिले संकेतो को ज्योकात्यो लागू न करके उसके संकेतो को लागू करना चाहिए। यदि चौथे भाव में शुक्र को कवि कहा है तो इसका मतलब है की जन्मे जातक में कवित्व के गुण भी होंगे।

कुंडली में विद्या योग

यहाँ चौथा भाव रिक्त है लेकिंग सूर्य,बुध, गुरु इसे देख रहे है. सूर्य स्वामी है, बुध 2 व 5 का स्वामी है और शनि भी 9 -10 का स्वामी इसे देख रहा है इस तरह से चौथा भाव बलशाली हो गया है.

निष्कर्ष

-भाव स्वामी का भाव को देखना उच्च शिक्षा का संकेत है. बुध और गुरु जातक को ज्योतिष में प्रवीण बना रहे है. गुरु द्वारा कानूनी शिक्षा, व् वैदिक अध्ययन का भी संकेतक है. शनि की दृष्टि भी जातक को इंग्लिश का विद्वान बना रही है, शुक्र से संगीत का संकेत मिलता है.

ये व्यक्ति इतिहासकार, ज्योतिषी, अधिक भाषाओ का जानकार साहित्यकार , व् अच्छा वकील भी था।

अनुभव द्वारा ये ज्ञात होता है कि संगीतज्ञ बनने के लिए शुक्र को 4,5 या 9 भाव में होना चाहिए या इन भावो पर इसके दृष्टि चाहिए, संगीतज्ञ के रूप में अगली भविष्यवाणी शुक्र से चद्र्मा का चौथे भाव में होने के रूप में की जा सकती है.

ज्योतिषी बनने के लिए बुध को चौथे भाव में होना चाहिए, सूर्य को पंचम में या बुध और सूर्य को दुसरे भाव में होना चाहिए।

सूर्य, बुध का पंचम में होना और गुरु का स्वग्रही या उच्च का होना दर्शाता है की व्यक्ति उच्च आध्यात्मिक वेद विशारद बनेगा।

चतुर्थ या पंचम में राहू व्यक्ति के चतुर राजनीतिज्ञ होने को दर्शाता है.

तो इस प्रकार से आपने देखा की व्यक्ति अपने जीवन में कुंडली के आधार पर ज्योतिषीय दिशा निर्देशों में शिक्षा प्राप्त करके में सफल आदमी

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