उपहार

Page Visited: 93

यहाँ आपके मनोरंजनार्थ ‘उपहार’ नाम से मात्र एक कविता प्रस्तुत की जा रही है, आशा है आपको पसंद आयगी

उपहार (gift)
जीवन का उपहार “तुम”


आप क्या प्राप्त हुए मुझे
बढ़ने लगी है,
घर की रौनक।
दीवारें मुस्कराने लगी हैं।
मेरा हाल भी
छत के जैसा हो गया है।
खिलखिलाती है
मुझे देख कर
जैसे मैं-
तुम्हें देख कर।
दर्पण व्यंग्य करता-सा लगता है,
मुंह देख कर मेरा।
रसोई बताती है,
कुछ जला है तुमसे
पर स्वाद नहीं खोया है
चटनी ने।
लोग मिलते हैं
जानने को हाल मेरा,
मै मुस्कुराता हुआ
चल देता हूं।
व्यंग्य कानों से टकराता है
‘उपहार’ कोई लगता है
मिला गया है मुझे।

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Leave a Reply

अपनी कुंडली स्वयं बनाओ

बनी हुई कुंडली को देखन या कंप्यूटर से कुंडली बनाना एक ही बात है लेकिन अपनी कुंडली बनाओ इसको यहाँ बताना हमारा उद्देश्य है.