आगे पीछे जानो

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मनुष्य जब पृथ्वी पर जन्म लेता है तो ये नहीं जानता की वह कहा से आया है.और कहा जाएगा . आगे पीछे जानो

में इसी की पड़ताल कर रहे है.

भारतीय ज्योतिषियों ,मनीषियों विद्वानों, आचार्यो, ने बड़ी मेहनत से पता लगाया था की मनुष्य कहा से आया है और कहा जाएगा. आगे पीछे जानो में हम देखेंगे की जब बच्चा जन्म लेता है तो उसके ग्रह ही इस बात की जानकारी देते है की वह कहा से आया है और क्या था. इस चीज की खोज की है भारतीय ऋषियों ने और अपने अनेक ग्रंथो में वे इसे बड़े ही रहस्य पूर्ण तरीके से लिख गए है.जिन्हें ग्रहो नक्षत्रो और राशियों की भाषा में हम यहाँ समझा रहे है.

बच्चा जब जन्म लेता है तो अक्षांश देशांतर निर्णय करने के पाश्चात उसके लगन का निर्धारण किया जाता है. तत्पश्चात कुंडली में ग्रहो को बैठाने के बाद यह निर्णय किया जा सकता है की बच्चा किस योनी से आया है. मरने के बाद उसकी क्या गति होगी.

जन्म से योनी विचार

यदि किसी की कुंडली में 4 ग्रह उच्च राशी के हो या स्व राशी के हो तो कह सकते है की जातक उत्तम योनी भोग कर आया है.

चन्द्रमा यदि स्व राशि या उच्च राशि का हो तो मानना चाहिए की वह उच्च कुल व् विवेक वन रहा होगा

.आगे पीछे जानो

लगन में यदि गुरु हो या कही भी किसी भी भाव में कर्क राशी यानि उच्च का होतो मानना चाहिए की वह वेद पाठी और पूर्व जन्म में धर्मात्मा,सद्गुणी एवं विवेक शील, साधू तपस्वी रहा होगा.

यदि बालक की कुंडली में सूर्य 6 -8 -12 में हो या तुला राशी का हो तो वह पूर्व जीवन में पाप आचरण करने वाला भ्रष्ट रहा होगा.

जिसकी कुंडली में शुक्र प्रथम या सप्तम होता है वह पूर्व जन्म में बड़ा धनिक प्रसिद्ध व्यक्ति रहा होगा.

कुंडली में 1-4-7-10 में यदि शनि होता है तो मानना चाहिए की वह पूर्व जन्म में शुद्र,परिवार से सम्बन्धित पापकर्म रत था.

यदि जातक की कुंडली में रहू प्रथम या सप्तम होता है तो उसकी पूर्व मृत्यु स्वाभाविक नहीं समझनी चाहिये.

यदि किसी की कुंडली में चार या अधिक ग्रह नीच राशी के हो तो उसने अवश्य ही आत्म हत्या की होगी ऐसा ऋषि कहते है.

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यदि कुंडली में बुध लग्नस्थ हो तो वह किसी बहिये का बेटा था कहना चाहिए और क्लेश युक्त जीवन बिताया होगा.

6-7-10 में यदि मंगल हो तो पता चलता है की वह पूर्व जन्म में अत्यधिक क्रोधी था सभी उससे पीड़ित थे .

पंचम या नवं भाव में गुरु शुभ ग्रहो से दृष्ट हो तो वह पूर्व जन्म में योगी रहा होगा.

11मे सूर्य, 5 में गुरु,12 में शुक्र हो तो इस बात का संकेत मिलता है की वह पूर्व जन्म में धर्मात्मा व् लोगो की सहायता में रत रहता था.

मृत्यु के बाद की गति.

मृत्यु के बाद जातक की क्या गति होती है.इसका ज्ञान भी ज्योतिष शास्त्र में लिखा गया है.

गुरु कही भी कुंडली में कर्क राशी का बैठा हो मृत्यु उपरांत उसकी अंत्येष्ठी बड़े धूम धाम से होती है. बाद में उच्च कुल में जन्म लेता है.

लग्न में स्वराशि या उच्च राशी का चंद्रमा हो तो और कोई पाप ग्रह न देखता हो तो ऐसे व्यक्ति की बाद में बड़ी प्रशंसा होती है. वेह कई कीर्ति कथाए छोड़ जाता है.

8 वे भाव का राहू जातक को पुण्यात्मा बनाता है. मरने में बाद वेह अच्छे घर में जन्म लेता है.

आठवे भाव पर यदि मंगल की दृष्टि हो और लग्नस्थ मंगल पर शनि की दृष्टि हो तो मरने के बाद वेह नरक भोगता है. 8 वे शुक्र पर यदि गुरु की दृष्टि हो तो जातक मरने के बाद बनिया कुल में जन्म लेता है.

8 वे भाव पर यदि मंगल और शनि की दृष्टि हो तो जातक अकाल मृत्यु मरता है.

8 वे भाव में न तो कोई ग्रह हो, न कोई ग्रह 8 वे को देखता हो तो बाद में वेह स्वर्ग्लोग की यात्रा करता है. ऐसा ऋषियों का मत है.

लग्न में गुरु चन्द्र, चतुर्थ में तुला का शनि, व् सप्तम भाव में मकर का मंगल हो तो जातक जीवन भर कीर्ति अर्जित करता है.

लग्न से उच्च का गुरु चन्द्र को पूर्ण दृष्टि से देख रहा हो तो और आठवा स्थान खली हो तो जातक बहुत पुण्यवान शुभ कर्म करने के बाद सद्गति को प्राप्त करता है.

आठवे भाव में मकर या कुम्भ राशी हो और शनि उन्हें देख रहा हो तो ऐसा जातक योगी होकर मृतु को प्राप्त होता है.

कुंडली में 4 उच्च ग्रह प्राप्त जातक मरने के बाद अपने जीवन की कीर्ति गाथाये छोड़ जाता है. वेह बहुत पुण्यवान होता है.

11 वे में सूर्य , बुध हो,9 में शनि हो और 8 में रहू हो तो जातक मरने के बाद मोक्ष प्राप्त करता है.

खास योग

बढ़ावे भाव में शनि राहू या केतू से युक्त हो साथ ही अष्टमेश से भी युक्त हो और षष्ठेश से दृष्ट हो तो मरने के बाद उसकी दुर्गति होती है

गुरु लग्न में हो सप्तम में शुक्र और कन्या का चंद्रमा हो और धनु लग्न में मेष का नवांश हो तो जातक मरने के बाद परम पद प्राप्त करता है.

आठवे भाव को गुरु शुक्र चन्द्र देखते हो तो मरने के बाद श्री क्रिशन के चरणों में स्थान प्राप्त होता है. ऐसा ऋषियों ने कहा है.

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