अष्टकवर्ग शोधन विधि

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त्रिकोण शोधन और एकाधि पत्य शोधन अष्टक वर्ग शोधन विधि में एक ऐसी विद्या जिसके द्वारा जातक की आयु कितनी है पता की जा सकती है

ग्रहो के गोचर वश विभिन्न राशियों में भ्रमण के कारन फल उत्पन्न होते है, लेकिन इन फलो का निरूपण हम अपनी राशि विशेष पर कैसे लागू करे कि हमें अपने या किसी और का वास्तविक ग्रह गोचर फल ज्ञात हो सके.इसके लिए भारतीय मनीषियों ने एक विधि का आविष्कार किया था वह थी अष्टकवर्ग शोधन विधि पद्धति.

यहाँ प्रस्तुत की गई कुंडली ही समस्त टेबल विस्तार का आधार है

अष्टकवर्ग शोधन विधि
अष्टकवर्ग शोधन विधि

वैसे हम अपने एक पोस्ट में पहले ही अष्टक वर्ग पर विचार कर चुके है. यहाँ हमारा उद्देश्य अष्टक वर्ग की एक विशेष उपशाखा एकाधिपत्य शोधन पद्धति की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना है.

Rashi123456789lag101112 
Grehaराहू गुरुमंगलरवि बुध शुक्रशनि केतूचाँद
sun44435544334548
moon67334440654349
marsh15226422414639
mercury34636553554554
jupitur54656436354556
vinus53455262456552
saturn37234352232339
Lagn16334635554

अष्टकवर्ग शोधन विधि अनुसार फल कहने की विधि 4 प्रकार से बताई गई है.

  1. पहली विधि मनुष्य की आयु कितनी है को जानना
  2. दूसरी विधि है विभिन्न अष्टक वर्ग द्वारा अनेक प्रकार से फल कहने की विधि.
  3. तीसरी विधि है त्रिकोण और एकाधिपत्य शोधन के पश्चात फल जानने की विधि
  4. चोथी विधि है अष्टक वर्ग की रेखाओ द्वारा गोचर फल जानने की विधि.

यहाँ हम उपरोक्त विधि द्वारा मनुष्य की आयु साधन की विधि का वर्णन करेंगे.

अष्टक वर्ग के विधिन्न वर्गों द्वारा जो आयु निश्चित की जाती है उसे भिन्नाषटक आयु वर्ग कहते है.फिर विभिन्न अष्टक वर्गों द्वारा प्राप्त रेखाओ जो आयु निर्णय किया जाता है उसे समुदाए अष्टक वर्ग आयु कहते है. लेकिन यहाँ प्रश्न उपस्थित होता है की ग्रह तो सात है फिर लग्नाश्टक वर्ग द्वारा प्राप्त आयु गणना को भी जोड़ा जय या नहीं. इस बारे में कोई एकमत नहीं है.

हर ग्रह की रेखाओ का 2 प्रकार से शोधन किया जाता है.

पहली विधि का नाम त्रिकोण शोधन है.दूसरी विधि का नाम एकाधिपत्य शोधन है.

12 राशियों को 4 त्रिकोणों में विभाजित किया गया है.

त्रिकोण शोधन विधि

1-मेष , सिंह, धनु, का एक त्रिकोण है. 2. वृष, कन्या , मकर का दूसरा त्रिकोण है. 3 मिथुन तुला कुम्भ का तीसरा त्रिकोण है.4 कर्क वृश्चिक और मीन को चोथा त्रिकोण है. इन्हें चार त्रिकोण खंड कहते है.नीचे त्रिकोण शोधन करने की विधि का वर्णन किया गया है. पहले नियम देखते है.

A-त्रिकोण की 3 राशियों में यदि किसी राशि में कम रेखा हो तो उस कम रेखा को बाकी दो राशियों की रेखाओ में से घटा दें .

B त्रिकोण की राशियों में किसे में शून्य हो तो ज्यो का त्यों छोड़ दो.

    C- यदि किसी त्रिकोण में रेखा संख्या बराबर हो तो वहां तीनो स्थानों पर शून्य माना जाए

एकधिपत्यशोधन विधि –त्रिकोण शोधन के बाद जो फल आए उसका एकाधिपत्य शोधन करना होता है.

Lagn     सूर्य चक्र       
जन्मकालीन ग्रहJUP-RAHMARSUN,MER,VENSAT,ketMONजोड़
राशि123456[$-7]78LAGN 9101112
रेखा44435544334548
त्रिकोण शोधन1100224100029
एकाधिपत्य शोधन0000200000024
राशि गुणक202444
ग्रह गुणक161026
sury

      chandr chakr       
जन्मकालीन ग्रहJUP-RAHMARSUN,MER,VENSAT,ketMONजोड़
राशि123456[$-7]78LAGN 9101112
रेखा67334440654349
त्रिकोण शोधन23030010211316
एकाधिपत्य शोधन02030010200311
राशि गुणक201270183693
ग्रह गुणक5+5+7=17101542
chandrma

      Mangal chakr       
जन्मकालीन ग्रहJUP-RAHMARSUN,MER,VENSAT,ketMONजोड़
राशि123456[$-7]78LAGN 9101112
रेखा15226422414639
त्रिकोण शोधन04005300302421
एकाधिपत्य शोधन00005000300412
राशि गुणक502748125
ग्रह गुणक40152075
mangal

      budh chakr       
जन्मकालीन ग्रहJUP-RAHMARSUN,MER,VENSAT,ketMONजोड़
राशि123456[$-7]78LAGN 9101112
रेखा34636553554554
त्रिकोण शोधन00203110210212
एकाधिपत्य शोधन0020300020029
राशि गुणक1630182488
ग्रह गुणक2024101064
budh

      guru chakr       
जन्मकालीन ग्रहJUP-RAHMARSUN,MER,VENSAT,ketMONजोड़
राशि123456[$-7]78LAGN 9101112
रेखा54656436354556
त्रिकोण शोधन20303001011011
एकाधिपत्य शोधन1000300100005
राशि गुणक730845
ग्रह गुणक2424
guru

      shukr chakr       
जन्मकालीन ग्रहJUP-RAHMARSUN,MER,VENSAT,ketMONजोड़
राशि123456[$-7]78LAGN 9101112
रेखा53455262456552
त्रिकोण शोधन11031020032316
एकाधिपत्य शोधन0003102001209
राशि गुणक12101452263
ग्रह गुणक810+10+14=3442
shukr

      shani chakr       
जन्मकालीन ग्रहJUP-RAHMARSUN,MER,VENSAT,ketMONजोड़
राशि123456[$-7]78LAGN 9101112
रेखा37234352232339
त्रिकोण शोधन14012030000112
एकाधिपत्य शोधन0101203000007
राशि गुणक01004202155
ग्रह गुणक1615+15+215167
shani

      lagn       
जन्मकालीन ग्रहJUP-RAHMARSUN,MER,VENSAT,ketMONsum
राशि123456?8LAGN 9101112
रेखा16334463555449
त्रिकोण शोधन02003030412116
एकाधिपत्य शोधन00003030411113
राशि गुणक30213651112115
ग्रह गुणक2415+15+21=51205100
lagn

एकाधिपत्य शोधन विधि

सूर्य चंद्रमा को छोड़कर हर ग्रह दो भावो का स्वामी होता है. जैसे-

मंगल- मेष –   वृश्चिक

गुरु-    धनु –   मीन

बुध –   मिथुन – कन्या

शनि – मकर –  कुम्भ

शुक्र – वृष-    तुला

चन्द्र – कर्क

सूर्य –   सिंह

इस कारण इन दोनों की राशियों में शोधन नहीं होता है.फल ज्यो का त्यों रहता है. लेकिन 10 राशियों का एकाधिपत्य शोधन किया जाता है.

 sun monmarmerjupvensat lag
rashising *karkमेष मिथुन *धनु *वृषमकर  
rashi  वृश्चिक कन्यामीन तुला *कुम्भ  
* ग्रह सहित राशी 

यहाँ हमें केवल बुध , गुरु, और शुक्र की ही राशियों पर विचर करना है. क्योंकि इनकी ही राशियों में ग्रह है.

1-त्रिकोण शोधन के उपरांत किसी ग्रह की दोनों राशियों में यदि ग्रह न हो और एक राशी से दूसरी राशी में अंक की अधिक संख्या हो तो अधिक अंक से कम अंक को घटा कर उसी स्थान पर लिख दे व् जो कम राशी अंक है उसे ज्यो का त्यों लिख दे .

उदाहरण स्वरूप त्रिकोण शोधन के बाद मेष में 3 अंक आता हो और वृश्चिक में 2 तो 3 में से 2 को घटने पर शेष 1 को मेष का फल मानना होगा और वृश्चिक में 2 का 2 ही रहेगा.

2-त्रिकोण शोधन के बाद एक राशी ग्रह सहित है और एक ग्रह रहित तो ग्रह सहित राशी में कम संख्या हो ग्रह सहित से तो कम को एइसे ही रहने दे बड़ी संखया में से कम संख्या को घटा कर जो अंक आए वेह लिख दो,

माना कि वृष ग्रह सहित लेकिन तुला ग्रह रहित हो, और त्रिकोण शोधन के बाद वृष में 3 अंक हो और तुला में 4 अंक आता हो तो वृष में 3 ही रहने दो और तुला में 1 लिख दो घटा कर.

3- ग्रह सहित राशी में त्रिकोण शोधन के बाद जो संख्या आई हो वेह ग्रह रहित राशी की संख्या से अधीक हो तो ऐसे में ग्रह रहित राशी को छोड़ दो (egnor) कर दो,जैसे मेंश में ग्रह सहित 3 अंक हो लेकिन वृश्चिक ग्रह रहित हो तो मेष में 3 ही रहेगा लेकिंण वृश्चिक को शून्य मिलेगा.

4 दोनों राशी ग्रह सहित हो तो ऐसे में राशियों को ज्यो का त्रयो अंको सहित रहने दो.

5- त्रिकोण शोधन के बाद यदि ग्रह रहित राशियो के अंक भी सामान हो तो भी त्याग दो.ऐसे में शून्य गिनो.

6- ग्रह सहित ग्रह रहित के अंक क्यों न सामान हो लेकिन ग्रह रहित राशी को त्याग दो अर्थात उसे शून्य अंक दो.

7 ग्रह सहित या ग्रह राइट राशिया त्रिकोण शोधन के बाद कोई राशी शून्य फल पाती है तो एकाधिपत्य में दोनों राशियों को शून्य ही मिलेगा यानि वरिश में यदि 3 अंक है और तुला में ० तो एकाधिप्त्ये में दोनों को शून्य ही मिलेगा.

Example applying here

उदाहरण कुंडली के सूर्य अष्टक वर्ग में मेष सिंह धनु के त्रिकोण में देखना होगा कितनी कितनी रेखाए है सूर्य अष्टक वर्ग में मेष में 4 सिंह में 5 और धन में 3 रेखाए है दोनों में से 3 घटने पर एक में 1 और दूसरी में 2 रख दे और धन में ० रख दें.

इसी प्रकार दूसरा त्रिकोण वृष , कन्या , मकर का है वृष में 4, कन्या में 5, और मकर में 3 रेखाए है सबसे कम 3 है. इस कारन वृष के नीचे 1, कन्या के नीचे 2, और मकर के नीचे 0 इसी रीती से अन्यो का भी त्रिकोंशोधन किया जाता है.

त्रिकोण शोधन के बाद त्रिकोण शोधित फलो का एकाधिपत्य शोधन किया जाता है. ऊपर टेबल में हमने राशियों व् उनके स्वामियों तथा ग्रह सहित राशी और ग्रह रहित राशी का उल्लेख कर दिया है. पहचान के लिए एक तारे का sign दिया गया है .

नीचे चक्र में दिखाया गया है के उल्लेखित कुंडली के सूर्य और मंगल के त्रिकोण शोधन के पश्चात एकाधिपत्य शोधन का क्या result आया है.

[table “43” not found /]

ग्रह पिंड राशी पिंड शोधन विधि

पहले ही बताया जा चुका है कि त्रिकोण शोधन फल का ही एकाधि पत्य शोधन किया जाता है.फिर प्राप्त फल में भी दो क्रियाएं और की जाती है. प्रत्येक राशी को भिन्न भिन्न बल प्राप्त है जिसको राशी गुणक कहते है.

राशीगुणक
मेष700
वृष1000
मिथुन8
कर्क4
सिंह1020
कन्या5
तुला7
वृश्चिक8
धन9
मकर5
कुम्भ
मीन
11
12
जोड़


44 पिंड

मतलब ये की एकाधिपत्य के बाद जो अंक मेष राशी को प्राप्त हो उसे उसके राशी जनक से गुना करके मेष के सामने लिख दो ठीक इसी प्रकार अन्य राशियों के साथ भी करना होगा.

यहाँ सूर्य अष्टक वर्ग में एकाधिपत्य शोध्नोप्रांत ०० आया है इसलिय 7 से गुना करने पर ०० प्राप्ति ही होगी. वृष में भी शून्य आया 10 से गुना करने पर फल शून्य ही रहा सिंह में गुणक 2 आया तो फल 20 हुआ इसी प्रकार सभी राशी गुणक को लिखना होता है.सभी संख्याओ को गुना कर्ण के बाद जोड़ लिया जाता है जिसे राशी पिंड कहते है.

भारतीय ज्योतिष के पुरातन ऋषियों ने हर ग्रह को अलग अलग बल दे रखा है जिसका नाम ग्रह गुणक है.

सुर्य 5चन्द्र 5मंगल 8बुध 5गुरु 10शुक्र 7शनि 5

इसका अभिप्राय ये है की जिस राशी में ग्रह होता है उसके उपरोक्त गुणक अंक को एकाधिपत्य शोध्नोप्रांत जिस राशी में जितना अंक मिला हो उससे गुना करके उसे राशी के सामने लिखना होता है. अगर किसे राशी में ज्यादा ग्रह होते है तो हर बार ग्रह गुणक को राशी के प्रतांक से गुना करके जोड़ कर लिखना होता है. जैसे तुला राशी में 3 ग्रह है और तुला में एकाहिपत्योप्रांत 1 अंक प्राप्त हुआ तो सुर्य 5 x1 =5 ,बुध 5 x 1 =5 ,शुक्र 7 x 1 =7 कुल जोड़ 17 हुआ.

इसी प्रकार हर इसी विधि से राशी गुणक और ग्रह गुणक का फल लाना होता है. जैसे सूर्य वर्ग में 16+10=26 ग्रह पिंड होता है. इसे प्रकार सभी ग्रहो और रशियो का पिंड बनाना होता है. सब क्रियाओ के बाद आयु बनाइ जाती है.

(वैसे आज कल कंप्यूटर द्वारा बनाइ गई कुंडली द्वारा राशी पिंड और ग्रह पिंड तक का गणना फल दिया होता है. पर आम जन को ये नहीं पता होता है की ये बनाया कैसे जाता है और इसका उपयोग क्या है वही हम आगे बताने जा रहे है. )

अष्टकवर्ग शोधन विधि के फल

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