अष्टकवर्ग विवरण

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अन्य देशों मे फल कहने की तीन विधियाँ प्रचलित हैं, लेकिन हमारे देश में कोन सी विधि है इसका अष्टकवर्ग विवरण में उल्लेख करेंगे

जन्म लग्न से ग्रहों की स्थिति अनुसार फल कहने की पहली विधि है।

जन्म कालीन चन्द्रमा जिसको चन्द्र लग्न भी कहते हैं को लग्न मान कर फल कहने की दूसरी विधि है।

एवं नवांश कुंडली के अनुसार फल कहने की तीसरी विधि है।

लग्न से शरीर का विचार होता है और चन्द्रमा से मन का ।

समस्त कार्य मन पर ही निर्भर है। मन ही से सुख एंव दुख का अनुभव होता है। मन की ही शान्ति अथवा अशान्ति के कारण मनुष्य सुकर्म एवं कुकर्म का भोग करता है। मन ही की सबलता एवं निर्बलता के कारण से ही ऋषियों ने चंद्र लग्न से अनेक प्रकार का विचार बताया है।

जन्म समय जिस राशि में चंद्रमा रहता है वह राशि प्रत्येक मनुष्य के जीवन का एक प्रबलस्थान होता है। अर्थात उस स्थान से जातक के जीवन की अनेक बातों का विचार हो सकता है।

इस कारण भारतीय विद्वानों का मत है कि हर आदमी जन्म स्थान से जन्मकालीन चंद्रमा से जिन जिन राशि में ग्रह भ्रमण करते हैं वैसा वैसा फल उस समय में जातक के जीवन में होता है।

इसी को गोचर फल कहते है। साधारणत 12 राशियाँ और चंद्रमा 12 राशियों में ही भ्रमण करेगा तो क्या 12 प्रकार के ही फल आदमी के जीवन में घटित होते रहेंगे! नहीं ऐसा नही है। और ऐसा होना भी नहीं चाहिए इस कारण विद्वानों ने जन्म कालीन ग्रहस्थिति से अर्थात जन्म समय में जिस जिस राशि में सात ग्रह स्थित हो और लग्न जिस राशि में स्थित इन आठ स्थानों से (अर्थात सात ग्रह और एक लग्न) से गोचर फल का फल यदि विचार किया जाए तो वह विचार विश्वसनीय होगा।

इसी विचार विधि का अष्टक वर्ग विधि कहते है।

हर ग्रह अपनी जन्म कालीन स्थिति के कारण अपना शुभ अशुभ फल प्रदान करता है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह विधि सुझाई गई कि आठ स्थानों में से सात ग्रह एवं लग्न किसी न किसी स्थान में शुभ फल देनेवाले होते हैं। विद्वानों ने इसका वर्णन विस्तार से किया है।

प्रत्येक ग्रह एवं लग्न को सूर्य कंुडली जिसको सूर्य अष्टक वर्ग कहते हैं में अपने अपने स्थान से किसी न किसी स्थान में बल प्राप्त होता है और चन्द्र कुडली जिसको चन्द्र अष्टक वर्ग कहते है मंगल कुंडली जिसको मंगल अष्टक वर्ग कहते हैं।

प्रत्येक ग्रह अपने अपने स्थान से जिन जिन स्थानों में बल प्रदान करता है इस शुभ फल दायित्व को रेखा या बिन्दू द्वारा दिखलाने का संकेत है। लेकिन हमारा सुझाव है कि रेखा या बिन्दू न देकर सीधे ग्रह को ही लिख देना चाहिये जिससे किस ग्रह ने शुभ परिणाम देने हैं और किस ने नहीं देने पता चल जाता है।

यहां हर ग्रह के अष्टक वर्ग चक्र दिये गए हैं जैसे सूर्य अष्टक वर्ग में शुक्र जिस स्थान में बैठा है उस स्थान की संख्या दी गई है।छठे एवं सातवे में शुभ फल देता है तो चक्र में शु के सामने 6-7-12 लिखा है । इसी प्रकार चन्द्र अष्टक वर्ग में वही शुक्र अपने स्थान से 3-4-5-7-9-10-11 स्थान में शुभ फल देता है। इत्यादि।

Sun table
अष्टकवर्ग विवरण
sunmoonmarshmerguruvenshanilagn
13135613
26256724
4104691246
7117911710
8810811
9911912
10101210
111111
अष्टकवर्ग विवरण
jupitur -Guru Table
अष्टकवर्ग विवरण
sunmonmarshmerguruvensatlana
mon2111231
tue5222552
wed7443664
thu97549115
fri11867106
sat1098117
sun1110109
mon111110
tue11
अष्टकवर्ग विवरण
venus – shukra table
अष्टकवर्ग विवरण
sunmoonmarshmerguruvenshanilagna
81334131
112555243
123669354
49910485
5111111598
8128109
991111
11102
1211
अष्टकवर्ग विवरण
moon table – chandra
अष्टकवर्ग विवरण

sunmoonmarshmerguruvenshanilagn
31211333
63334456
765475610
8765871111
101097109
10111081110
101211
अष्टकवर्ग विवरण
Marsh table – mangal
अष्टकवर्ग विवरण
sunmoonmarshmerguruvenshanilagn
33136611
562510843
61146111176
107111212810
118911
1010
1111
अष्टकवर्ग विवरण
lagna table
अष्टकवर्ग विवरण
sunmonmarmeguruvensatlagna3
33111116
462222310
6103443411
101166546
11121086510
11107811
1199
10
11
अष्टकवर्ग विवरण
mercury table – Budha table
अष्टकवर्ग विवरण
sunmoonmarshmerguruvenshanilagn
52116111
64238222
964511344
1187612476
121089588
119108910
101191011
11121111
अष्टकवर्ग विवरण
saturn table- shani table
अष्टकवर्ग विवरण
sunmoonmarshmerguruvenshanilagn
13365631
265861153
41169111264
7101012116
8111110
10121211
11
अष्टकवर्ग विवरण

अष्टक वर्ग की उपयोगिता।

अष्टक वर्ग विधि अनुसार चार प्रकार से ज्योतिष शास्त्र में फल वर्णन की विधि बताई गई है।

1- पहली विधि मनुष्य के आयु साधन की हैं 2 दूसरी विधि अलग अलग अष्टक वर्गों में रेखाओं द्वारा अनेक प्रकार के फल बताने की है। 3 तीसरी विधि त्रिकोण एवं एकाधिपत्य शोधन के बाद फल जानने की है। 4 चैथी विधि गौचर अनुसार फल जानने की हैं।

अष्टकवर्ग विवरण
अष्टकवर्ग विवरण

सर्वाष्टक वर्ग चक्र

सात ग्रहों ने अलग अलग ग्रह वर्गों में कितनी बार रेखाएं दी इसमें यहां पता चलता हैं उन्हीं सातों अष्टक वर्ग चक्रों में मेष राशि में जितनी रेखाएं पड़ी हेां एवं वृष राशि में जितनी रेखाएं पड़ी हों इत्यादि उनहीं रेखाओं को प्रत्ये राशि में जोड़कर बारहों राशियों की रेखाओं को अलग अंकित करके और जन्म कंुण्डली के अनुसार जिसकी जन्म कंुण्डली का अष्टकवर्ग बनाया गया हो ग्रहों को स्थापित करके जो चक्र होगा उसी सर्वाष्टक वर्ग चक्र कहते हैं।

टेबल में दिखाया गया है कि किस अष्टक वर्ग में कोन सा ग्रह किन स्थानों पर शुभ रेखा दे रहा है।

अब उदाहरण कंुडली का अष्टक वर्ग दिया जाता हैं कि जिसे रेखा देने की विेधि स्पष्ट हो जाए। रेखा ना दे कर रेखा देने वाले ग्रह को ही हमने लिख दिया है। जन्म कालीन ग्रह की राशि स्थिति ग्रह कालम में दी गई है।

पहले सूर्य अष्टक वर्ग है। देखने से पता चलता हैं कि सूर्य जिस राशि में बैठा है उस राशि में रेखा देता है।

उदाहरण कंुडली में सूर्य तुला में है। इस कारण तुला राशि में र(रवि) लिखा है फिर सूर्य अपने स्थान से द्वितीय स्थान में भी रेखा देता है। इस कारण तुला से दूसरे स्थान वृश्चिक में र लिखा। फिर चैथे स्थान में भी रेखा देता है इस कारण तुला से चैथे मकर में र लिखा है फिर सातवें में रेखा देता है इस कारण तुला से सातवे मेष मेें र लिखा नवम में भी रेखा देता है इस कारण तुला से नवम मिथुन में र अंकित किया । दशम में भी रेखा देता है, इस कारण तुला से दशम कर्क में र लिखा अंाखिरी रेखा 11वंे स्थान में देता है इस कारण तुला से 11वें सिंह में र लिखा। यह सूर्य अष्टक वर्ग में सूर्य द्वारा दी गई रखायें हुई

इसी तरह चंद्रमा का रेखा इसी सूर्य अष्टक वर्ग में देना होगा। सूर्य वर्ग में चंद्र अपने स्थान से तीसरे में रेेखा देता है इस कारण चंद्र मीन में बैठा है तो मीन से से गिन कर तीसरा स्थान वृष है वहां चंद्र रेखा देगा अर्थात चं लिखा।टेबल में देखंे तो वृष के नीचे ग्रह के सामने चं लिखा है।

अतः ठीक इसी प्रकार से सभी ग्रहों के बारे में स्वयं। अष्टक वर्ग बना कर देखें। यहां हमने स्वयं द्वारा निर्मित टेबल को बना दिया है। चाहेे तो इस पर भी अभ्यास किया जा सकता है।

टेबल सूर्य

sun48tick
Rashi789101112123456
Grehsunshanimoongurumarsh
Grehvenketurahu
Grehmer
sun
moon
marsh
mer
guru
ven
sat
lagna
total443345444355
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